डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मामूली सुधार ने सोमवार को घरेलू बाजार में सोने को सहारा दिया। दिल्ली में 24 कैरेट यानी 99.9% शुद्धता वाला सोना 200 रुपये बढ़कर 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, लगातार तीन कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद चांदी की कीमत स्थिर रही। यह उन लोगों के लिए अहम खबर है, जो सोने-चांदी की खरीदारी या निवेश की योजना बना रहे हैं।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमत में मामूली तेजी दर्ज की गई। शुक्रवार को 99.9% शुद्धता वाले सोने का भाव 1,46,100 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो सोमवार को 200 रुपये बढ़कर 1,46,300 रुपये हो गया।
सोने की कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह रुपये का कमजोर होना रहा। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरा और 29 पैसे कमजोर होकर 95.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। ऐसे में जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो भारतीय आयातकों को सोना खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
वैश्विक बाजार में भी सोमवार को सोने की कीमत में हल्की बढ़त देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 17.49 डॉलर यानी 0.44% बढ़कर 4,013.12 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
इसके विपरीत, चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमत में खास बदलाव नहीं हुआ और यह 53.91 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती रही।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटी के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली सुधार के साथ कच्चे तेल की कमजोर कीमतों, अमेरिकी डॉलर में स्थिरता और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बेंचमार्क यील्ड में गिरावट ने सोने को समर्थन दिया।
बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न में गिरावट सोने जैसे निवेश विकल्पों को अपेक्षाकृत आकर्षक बना सकती है। सोना खुद नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है।
सोने की कीमतों पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम का भी असर रहा। मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक, खाड़ी देशों की ओर से अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिशों के बीच सोने की कीमत में बढ़त दर्ज की गई। वहीं, अमेरिका ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय निवेशक अक्सर सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। हालांकि, कीमतों पर इसका वास्तविक असर दूसरे आर्थिक और बाजार कारकों के साथ मिलकर तय होता है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, इस सप्ताह निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले पर रहेगी।
निवेशक खास तौर पर ब्याज दरों के भविष्य के रुख और केविन वार्श के मार्गदर्शन पर ध्यान देंगे। महंगाई से जुड़ी चिंताएं और अमेरिकी चुनाव से संबंधित अनिश्चितता भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हैं।
सोमवार को सोने की कीमत में 200 रुपये की बढ़त और चांदी का स्थिर रहना घरेलू तथा वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों को दर्शाता है। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख, रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सोने-चांदी की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।