सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कमजोर घरेलू मांग और वैश्विक रुझानों के कारण यह गिरावट आई है। सोना 9,050 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ, जबकि चांदी 10,500 रुपये प्रति किलोग्राम गिरी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने गिरावट के कई कारण बताए हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को एक मुख्य वजह बताया। इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चढ़ी हैं। इससे मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। आक्रामक मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना भी बढ़ी है। गांधी ने कहा कि आक्रामक मौद्रिक नीति की संभावना से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़ी। इससे डॉलर भी मजबूत हुआ, जिसने सोने और चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई। हाजिर सोना 227.42 अमेरिकी डॉलर गिरकर 4,263.73 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यह 5.06 फीसदी की गिरावट थी। चांदी भी 4.25 अमेरिकी डॉलर गिरकर 63.53 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। यह 6.3 फीसदी की गिरावट थी। मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटीज के प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया कि बढ़ती ब्याज दर की उम्मीदों ने कीमतों पर दबाव डाला। पिछले सप्ताह सोने की कीमतों में 10 फीसदी से अधिक की गिरावट आई थी। यह चार दशकों में सोने की सबसे खराब साप्ताहिक गिरावट थी।
वेंचुरा के कमोडिटी और सीआरएम के प्रमुख एन एस रामास्वामी ने ईरान संघर्ष के कारण तेल संकट का जिक्र किया। इससे उन देशों का राजस्व प्रभावित हुआ जो स्वर्ण भंडार बना रहे थे। कम अधिशेष के कारण स्वर्ण भंडार में कमी आई है। इससे सोने की मांग में भारी कमी आई है। रामास्वामी ने कहा कि केंद्रीय बैंक अस्थायी राजस्व कमी के कारण अपनी स्वर्ण संचय रणनीति नहीं छोड़ेंगे। जब तेल का प्रवाह सामान्य होगा और अधिशेष फिर से बढ़ेगा, तो सोने की संरचनात्मक मांग फिर से मजबूत होगी।