पिछले छह वर्षों में सोने ने शेयर बाजार की तुलना में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दिया है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक बाजार में अनिश्चितता, मौद्रिक नरमी और केंद्रीय बैंकों और रिटेल निवेशकों की ओर से मजबूत मांग रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी कीमतों में वृद्धि की मुख्य वजहें वैश्विक स्तर पर बढ़ता व्यापारिक तनाव है, जो कि ट्रंप के ताजा चीन पर लगाए गए 100 प्रतिशत टैरिफ के कारण तेज हुआ है। इस साल धनतेरस पर सोने की कीमतों में 5000 रुपये तक कमी आई है, जिसकी वजह से बाजारों में रौनक बढ़ गई है। सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि इस साल 35 टन से अधिक सोने की बिक्री होने की उम्मीद है।
मुंबई में शुक्रवार को सोने की कीमतें 1,36,000 रुपये प्रति 10 पर थी, जो शनिवार 18 अक्तूबर धनतेरस के दिन 5000 रुपये गिरकर 1,31,425 रुपये 10 ग्राम पर कारोबार करती दिखी। चांदी की कीमत 157,590 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट बताती है कि सोने की कीमतें बढ़ने की वजह से लगभग छह वर्षों में 200 प्रतिशत से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी-50 ने लगभग 120 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। मई 2019 से जून 2025 तक सोने की कीमतें 30,000 रुपये से बढ़कर 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
पिछले छह वर्षों में कई कारण रहें, जिन्होंने सोने की कीमतें बढ़ाने में मदद की है। पहला, कोविड-19 महामारी, दूसरा, रूस -यूक्रेन युद्ध, लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति, धीमी वैश्विक आर्थिक वृद्धि और आक्रामक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी मुख्य कारण रहे। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों की वजह से बढ़ते व्यापार युद्ध ने सोने और चांदी की कीमतों पर आसमान पर पहुंचा दिया है। भविष्य में भी चीन और अमेरिका के बीच बढ़ता व्यापार युद्ध कीमतों में और वृद्धि कर सकता है।