EU-Mercosur FTA: यूरोपियन यूनियन और दक्षिण अमेरिकी देशों के मर्कोसुर ब्लॉक ने शनिवार को औपचारिक रूप से एक लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किए। जो कि दुनिया भर में बढ़ते संरक्षणवाद और व्यापार तनाव के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए 25 वर्षों से अधिक की मुश्किल बातचीत के बाद हुआ है।
यूरोपीय संघ (EU) और दक्षिण अमेरिकी देशों के संगठन मर्कोसुर (Mercosur) ने शनिवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए। यह समझौता करीब 25 साल तक चली लंबी और जटिल वार्ताओं के बाद संभव हो सका है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर बढ़ते संरक्षणवाद और व्यापारिक तनावों के बीच आपसी वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करना है।
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पराग्वे की राजधानी असुनसियोन में हुए हस्ताक्षर समारोह को यूरोपीय संघ के लिए एक बड़ी भू-राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। अमेरिकी टैरिफ नीति और चीन के बढ़ते निर्यात के दौर में यह समझौता ईयू को संसाधन-समृद्ध दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर देगा, जहां अमेरिका और चीन के बीच प्रभाव बढ़ाने की होड़ तेज है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक कूटनीति के स्तर पर भी अहम संकेत देता है। इससे यह संदेश जाता है कि दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पश्चिमी गोलार्ध में प्रभुत्व की घोषणाओं के बावजूद, विविध देशों के साथ व्यापार और कूटनीतिक रिश्ते बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
27 देशों में से अधिकतर ने जताया समर्थन
यूरोपीय संघ-मर्कोसुर मुक्त व्यापार समझौते से दोनों क्षेत्रों के बीच आयात-निर्यात बढ़ने, निवेश के नए अवसर खुलने और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे पहले शुक्रवार (16 जनवरी) को ब्रसेल्स में राजदूतों की बैठक के बाद यूरोपीय संघ के 27 देशों में से अधिकतर ने इस मुक्त व्यापार समझौते पर समर्थन जताया था। बता दें कि मर्कोसुर लैटिन अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जिसमें अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे शामिल हैं। हालांकि ईयू की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस समेत पांच देश मर्कोसुर समझौते के खिलाफ हैं। जिसमें फ्रांस के अलावा आयरलैंड, पोलैंड, हंगरी और ऑस्ट्रिया के नाम शामिल है।