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Gold and Silver: सुरक्षित निवेश की मांग के बीच सोने-चांदी कीमतों में तेजी, जानकारों ने बताया क्या है वजह

Tue, 09 Sep 2025 05:38 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Gold and Silver Prices: सोने-चांदी की कीमतों की बढ़ने की वजह वैश्विक निवेशकों में आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में कमजोरी और ब्याज दरों में संभावित कटौती के साथ सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग है। वैश्विक बाजार में सोने का भाव 3,475 डॉलर प्रति औंस और चांदी 40 डॉलर प्रति औंस पर है।
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सोने-चांदी का भाव - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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भारत में सोने कीमत 9 सितंबर को 1,10,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। इसकी प्रमुख वजह वैश्विक बाजार है, जहां निवेशक कीमती धातुओं की मांग बढ़ रही है। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है। एक्सिस म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में कीमती धातुओं में तेजी बनी हुई है। वैश्विक बाजार में सोने का भाव 3,475 डॉलर प्रति औंस और चांदी 40 डॉलर प्रति औंस पर है। चांदी की कीमतें अपने 13 साल के उच्चतम स्तर पर हैं।

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इन कारणों से बढ़ रही सुरक्षित निवेश की मांग

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार चांदी की कीमतें 37 प्रतिशत वर्ष दर वर्ष (YTD) रैली के बीच 1.5 लाख तक बढ़ने की उम्मीद है। सोने-चांदी की कीमतों की बढ़ने की वजह वैश्विक निवेशकों में आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में कमजोरी और ब्याज दरों में संभावित कटौती के साथ सुनिश्चित व सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग है। वहीं चांदी में औद्योगिक विकास और इन्वेस्टमेंट इनफ्लो का सपोर्ट बना हुआ है।

सोने की कीमतों तेजी की वजह

एक्सिस म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार सोने की कीमतें इसलिए बढ़ी हुई हैं, क्योंकि डॉलर इंडेक्स फरवरी 2025 में 110 से गिरकर 97.7 पर आ गया है।  ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के साथ फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती संभावना है। दूसरा अनिश्चित वैश्विक भू-राजनीति, ट्रेड वॉर और अमेरिकी राजनीतक में दबाव से निवेशक सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं। वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में मांग तीन प्रतिशत बढ़कर 1,249 टन रही। वहीं भारतीय बाजार में सोना 1 लाख  प्रति 10 ग्राम पार कर गया, जिसके बाद ग्राहक पुराना सोना बेच रहे हैं। वहीं 9 कैरेट (37% शुद्धता) सोने के आभूषण में शामिल करने और हॉलमार्किंग बढ़ाने से इसमें मांग बढ़ी है।

सोने का आउटलुक $3,400 से $3,600 प्रति औंस रहने की संभावना

रिपोर्ट के अनुसार सोना 2025 में $3,400 से $3,600 प्रति औंस के दायरे में रहने की संभावना है। अगर अमेरिकी नीतिगत अनिश्चितता समाप्त हो जाती है या वैश्विक ट्रेड वार की परेशानी कम होती है, तो सोने की कीमतों में तेज गिरावट तो नहीं आएगी, थोड़ा बहुत करेक्शन यानी कीमतें कम होने  की संभावना है।
 

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चांदी की कीमतों में तेजी की वजह

मोतीलाल ओसवाल के कमोडिटी रिपोर्ट के अनुसार चांदी की कीमतें 37 प्रतिशत वर्ष दर वर्ष (YTD)रैली के बीच 1.5 लाख तक बढ़ने की उम्मीद है। सुरक्षित निवेश की मांग और औद्योगिक उपयोग से इसको दोनों का समर्थन मिला है। चांदी में साल दर साल लगभग 37 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत उछाल देखा गया है। 2025 में चांदी ने सोने के साथ 81 प्रतिशत और तांबे के साथ 75 प्रतिशत सहसंबंध दिखाया, जिससे निवेश और औद्योगिक धातु के रूप में इसकी दोहरी भूमिका और मजबूत हुई है।

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चांदी की मांग और आपूर्ति

2025 में चांदी की कुल उत्पादन में औद्यौगिक मांग की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। वहीं 2025 में आभूषणों के मांग 6 प्रतिशत की गिरावट आने के अनुमान है। चांदी के पुनर्चक्रण  में 5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। अगर चांदी के प्रवाह की बात करें तो 2025 में चांदी के ईटीएफ और ईटीपी में उल्लेखनीय प्रवाह देखा गया, सऊदी सेंट्रल बैंक ने चांदी से जुड़े ईटीएफ में लगभग 40 मिलियन डॉलर का निवेश किया। वहीं 2025 की पहली छमाही में घरेलू चांदी का आयात 3,000 टन को पार कर गया। रिपोर्ट के अनुसार रूस ने तीन वर्षों में राज्य भंडार के लिए 535 मिलियन डॉलर मूल्य की चांदी खरीदारी करने की योजना की घोषणा की है।

चांदी का आउटलुक

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट कहती है चांदी पर दीर्घकालिक सकारात्मक दृष्टिकोण बना हुआ है। चांदी 1,11,111 और 1,25,000 के पूर्व लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद, अब घरेलू मोर्चे पर चांदी के 1,35,000 और उसके बाद 1,50,000 की ओर बढ़ने की उम्मीद है (यह मानते हुए कि USDINR 88.5 पर है)। लंबी अवधि के लिए समर्थन स्तर 1,04,000 से 1,08,000 के आसपास है, जहां 12 से 15 महीनों की अवधि में गिरावट पर खरीदारी की सलाह निवेशकों को रिपोर्ट में दी गई है।


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