2014 से कारोबार को आसान बनाने के लिए अनगिनत क्रांतिकारी सुधार किए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय स्टेट बैंक के एक कार्यक्रम में यह बात कही है। इस दौरान वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा वैश्विक मूल्य शृंखला विघटनकारी दौर से गुजर रही है। ऐसे में बुनियादी ढांचे के निर्माण पर सरकार का मुख्य ध्यान है। पिछले कुछ वर्षों में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एसबीआई के एक कार्यक्रम में कहा कि वैश्विक चुनौतियां प्रमुख होती जा रही हैं; वैश्विक संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि देश को बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की जरूरत है। इस बारे में रिजर्व बैंक और दूसरे बैंकों से बातचीत चल रही है। 12वें एसबीआई बैंकिंग और इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए हुए सीतारमण ने ऋणदाताओं से उद्योग के लिए ऋण प्रवाह को गहरा और व्यापक बनाने के लिए कहा। वित्त मंत्री ने भरोसा जताते हुए कहा कि जीएसटी दर में कटौती से बढ़ी मांग एक बेहतर निवेश का सिलसिला शुरू करेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को बड़ी संख्या में विश्वस्तरीय बैंकों की जरूरत है। उन्होंने कहा, "सरकार इस पर विचार कर रही है और काम शुरू हो चुका है। हम आरबीआई के साथ चर्चा कर रहे हैं। हम बैंकों के साथ चर्चा कर रहे हैं।" निजीकरण की प्रक्रिया के तहत सरकार ने जनवरी 2019 में आईडीबीआई बैंक में अपनी 51 प्रतिशत नियंत्रणकारी हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को बेच दी थी।
सेबी ने अगस्त 2025 में आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक विनिवेश पूरा होने पर बैंक के प्रमोटर से सार्वजनिक शेयरधारक के रूप में जीवन बीमा निगम के पुनर्वर्गीकरण को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण भी किया। बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़े एकीकरण की पहल करते हुए सरकार ने अगस्त 2019 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चार बड़े विलय की घोषणा की थी। इससे देश में बैंकों की कुल संख्या 2017 के 27 से घटकर 12 हो गई।
1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का पंजाब नेशनल बैंक में विलय कर दिया गया; सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में विलय कर दिया गया; इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय कर दिया गया; और आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में एकीकरण कर दिया गया।
2019 में देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय कर दिया गया था। इससे पहले, सरकार ने एसबीआई के पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का भारतीय स्टेट बैंक में विलय कर दिया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचे का निर्माण सरकार का मुख्य फोकस है और पिछले दशक में पूंजीगत व्यय में पांच गुना वृद्धि हुई है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से आग्रह किया कि वे ग्राहकों के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए शाखा कर्मचारियों को स्थानीय भाषा की जानकारी देना सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी अफसोस जताया कि ग्राहकों के साथ संपर्क कम होने से क्रेडिट सूचना कंपनियों पर अतिरिक्त निर्भरता बढ़ गई है, जो डेटा को अपडेट करने में लंबा समय लेती हैं, जिसके कारण ग्राहकों को ऋण देने से मना कर दिया जाता है।
स्थानीय भाषा न बोलने के कारण बैंक अधिकारियों को राजनीतिक दलों के गुस्से का सामना करने की कई घटनाओं के बाद आई इस टिप्पणी में मंत्री ने भर्ती और मानव संसाधन नीतियों में बदलाव की भी वकालत की। वित्त मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि स्थानीय भाषा बोलने वाले लोगों की भर्ती की जाए और उनका बेहतर मूल्यांकन भी हो।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को शेयर बाजार में एफएंडओ कारोबार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार खुदरा कारोबारियों को वायदा व विकल्प (एफएंडओ) बाजार में हिस्सा लेने से नहीं रोक सकती। हालांकि ऐसे उपकरणों में पैसा लगाने से जुड़े जोखिमों के बारे में लोगों को जागरूक जरूर किया जाएगा। वित्त मंत्री का यह बयान सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की ओर से निफ्टी और सेंसेक्स में साप्ताहिक डेरिवेटिव अनुबंधों को बंद करने से इनकार करने के कुछ दिनों बाद आया है।
एफएंडओ पर सरकार के रुख के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुंबई में सीतारमण ने कहा, "सरकार एफएंडओ कारोबार पर नहीं लगा सकती, लेकिन यह डेरिवेटिव (वायदा व विकल्प कारोबार) में शामिल जोखिमों के बारे में लोगों को जागरूक कर सकती है। एफएंडओ खंड में खुदरा विक्रेताओं को बड़ी मात्रा में धन का नुकसान होता है।"
एसबीआई बैंकिंग और इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने निवेशकों को भी सलाह दी कि वे इसमें शामिल जोखिमों को समझें। उन्होंने एफएंडओ खंड में खुदरा कारोबारियों की भागीदारी बढ़ने से होने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए भी सुझाव मांगे।
सेबी के एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि वायदा व विकल्प (एफएंडओ) में 91 प्रतिशत व्यक्तिगत व्यापारियों को वित्त वर्ष 2025 में शुद्ध घाटा हुआ। उन्हें इस कारण सामूहिक रूप से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। यह वह पैसा है जिसका इस्तेमाल निवेश और पूंजी निर्माण में में हो सकता था।
हाल के आईपीओ में ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताओं के बीच सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को साफ किया कि पूंजी बाजार नियामक इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। पांडे ने यहां एक्सीलेंस इनेबलर्स कार्यक्रम के अवसर पर संवाददाताओं से कहा, "हम मूल्यांकन का निर्धारण नहीं करते। यह निवेशक का काम होता है।"
बाद में एसबीआई के एक कार्यक्रम में बोलते हुए पांडे ने कहा कि सेबी आईपीओ लाने वाली कंपनियों द्वारा ऑफर दस्तावेज में बताई गई जानकारी को और अधिक तर्कसंगत बनाने पर भी विचार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सारांश निवेशकों को प्रस्ताव दस्तावेज से अलग से उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें अधिक स्पष्ट तरीके से जानकारी मिल सके और वे अधिक सजग होकर प्रतिक्रिया दे सकें। उन्होंने कहा कि आईपीओ से जुड़ी कंपनियों, जिनके आईपीओ से पहले शेयर गिरवी रखे गए हैं, के लिए प्रक्रिया को भी सुव्यवस्थित किया जा रहा है।