दुनियाभर में बढ़ रही आर्थिक अनिश्चितता के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का जोखिम बढ़ रहा है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ेगा। इस समय से लेकर 2026 के बीच वैश्विक उत्पादन में करीब 4 ट्रिलियन डॉलर (329 लाख करोड़ रुपये) की चपत लगेगी। यह नुकसान जर्मनी की अर्थव्यवस्था के बराबर है।
आईएमएफ और विश्व बैंक की सालाना बैठक से पहले बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा। चिंताजनक बात यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था सापेक्षिक पूर्वानुमान से व्यापक अनिश्चितता की ओर बढ़ रही है। हालात इससे अधिक बुरे भी हो सकते हैं। चीजों के बेहतर होने के पहले और खराब होने की आशंका अधिक दिख रही है।
एक तिहाई देशों की घटेगी वृद्धि दर
जॉर्जिवा ने कहा, दुनियाभर में मंदी के जोखिम बढ़ रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक तिहाई देशों की आर्थिक वृद्धि दर में इस साल या अगले साल कम-से-कम दो तिमाहियों में गिरावट आएगी। अगले सप्ताह जारी होने वाले विश्व आर्थिक परिदृश्य में वैश्विक वृद्धि अनुमानों को और घटाया जाएगा।
विकास दर अनुमानों पर तीन बार कटौती
उन्होंने कहा, यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर हमारा परिदृश्य नाटकीय रूप से प्रभावित हुआ है। कई देशों पर इसका गहरा असर दिखा है। इसलिए हमने अपने वृद्धि अनुमानों को पहले ही तीन बार घटाकर 2022 के लिए 3.2% कर दिया है। 2023 में वैश्विक वृद्धि दर को भी घटाकर 2.9% कर दिया है। हालात को देखते हुए हम अगले वर्ष के लिए वृद्धि दर अनुमानों को और घटाएंगे।
ब्याज दर बढ़ाने के अच्छे परिणाम नहीं
आईएमएफ प्रमुख का कहना है कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के बढ़ते महंगाई पर काबू पाने की उम्मीद में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के परिणाम बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। केंद्रीय बैंकों की ओर से मौद्रिक नीति को आक्रामक तरीके से सख्त करना कई अर्थव्यवस्थाओं को लंबे समय तक मंदी के भंवर में धकेल सकता है।