अमेरिका में महंगाई, जर्मनी की मंदी व रूस-यूक्रेन युद्ध से पानीपत औद्योगिक नगरी पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। हालात यह है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों में कपड़ों की मांग 50 फीसदी तक घट गई है। छह माह में पानीपत से कपड़ों का निर्यात 3,000 करोड़ रुपये तक घट गया है। इस कारण इस साल के अंत तक निर्यात सिर्फ 10,000 करोड़ रुपये तक रहने का अनुमान है। 2022 में पानीपत से 16,000 करोड़ व 2021 में करीब 15,500 करोड़ का निर्यात हुआ था।
विदेश में कपड़ों की मांग घटने से धागे की कीमत में 20 फीसदी की गिरावट आई है। धागे की कीमत 110 रुपये से गिरकर 85 रुपये पर आ गई है। निर्यात घटने से पानीपत में उद्यमियों को सप्ताह में दो दिन उद्योग बंद रखना पड़ रहा है। इसका असर बेडसीट और कंबल उद्योगों पर भी पड़ा है। कपड़ा उत्पादन 25 फीसदी तक प्रभावित हुआ है।
90,000 करोड़ का घरेलू बाजार
हैंडलूम सिटी के नाम से मशहूर पानीपत से पूरे देश में कंबल, बेडशीट, तकिया-सोफा कवर, पर्दे और तौलिये समेत तमाम उत्पाद भेजे जाते हैं। इन उत्पादों का घरेलू बाजार 90,000 करोड़ और निर्यात 16,000 करोड़ तक पहुंचा था। पानीपत से 112 देशों में निर्यात होता है। हैंडलूम सिटी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन और तुर्किये के लिए बड़ी चुनौती है।
उत्पादन में इटली को पीछे छोड़ने वाले धागा उद्योग पर अब संकट
पानीपत एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान ललित गोयल ने बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से यूरोप बुरी तरह से प्रभावित है। गैस के दाम बढ़ गए हैं। यूरोप और अमेरिका में महंगाई चरम पर पहुंच गई है, इसलिए पानीपत के उद्यमियों को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। निर्यात काफी कम हो गया है। इसका असर पानीपत के उस धागा उद्योग पर पड़ रहा है, जिसने 2022 में प्रतिदिन 20 लाख किलोग्राम धागे का उत्पादन कर इटली को पीछे छोड़ दिया था। उम्मीद है आने वाले समय में निर्यात में सुधार होगा।