जानकारों का कहना है कि 2023 की पहली छमाही में भी कंपनियों के सामने पैसा जुटाने की चुनौती बनी रह सकती है। हालांकि, बाजारों में अगर तेजी आती है तो भी अगले कुछ साल तक फंड जुटाने की रफ्तार धीमी ही बनी रहेगी
चालू वर्ष में कंपनियों की डेट और इक्विटी के जरिये जुटाई गई रकम 20 फीसदी घट कर 11 लाख करोड़ रुपये रह गई है। 2021 में कंपनियों ने 13.6 लाख करोड़ रुपये जुटाया था। इसमें 6.8 लाख करोड़ रुपये डेट से, 2.85 लाख करोड़ इक्विटी से और 1.2 लाख करोड़ रुपये प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से जुटाए गए थे।
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ब्याज दर ज्यादा होने और बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण कंपनियों ने इस साल रकम जुटाने की रफ्तार कम कर दी। 11 लाख करोड़ में से 6.92 लाख करोड़ रुपये डेट बाजार से और 1.62 लाख करोड़ रुपये इक्विटी बाजार से जुटाए गए। 2.52 लाख करोड़ विदेशी बाजारों से कंपनियों ने जुटाया। जानकारों का कहना है कि 2023 की पहली छमाही में भी कंपनियों के सामने पैसा जुटाने की चुनौती बनी रह सकती है।
डेट बाजार से 6.92 लाख करोड़ रुपये मिले
अगर अमेरिका में मंदी की आशंकाएं खत्म होती हैं तो दूसरी छमाही में वैश्विक स्तर पर बाजारों में तेजी दिख सकती है। उसकी वजह से भारतीय बाजारों के भी निवेशकों की धारणा सकारात्मक हो जाएगी।
हालांकि, बाजारों में अगर तेजी आती है तो भी अगले कुछ साल तक फंड जुटाने की रफ्तार धीमी ही बनी रहेगी।