खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई ने देश की कई बड़ी ऑनलाइन व्यापार और खाद्य वितरण कंपनियों पर कड़ा रुख अपनाया है। अमेजन, स्विगी, इंस्टामार्ट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट इंडिया और ज़ेप्टो जैसी कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। यह कार्रवाई विभिन्न नियमों के उल्लंघन के आरोप में की गई है।
एफएसएसएआई ने बुधवार को एक बयान में यह जानकारी दी। नियामक ने बताया कि इन मंचों पर उत्पादों के संबंध में भ्रामक दावे किए जा रहे थे। साथ ही, प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों की बिक्री भी की जा रही थी। एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से इस बड़ी कार्रवाई की सूचना दी। इसमें नियामक ने साफ किया कि ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा नियामक नियमों का उल्लंघन किया गया है।
इन उल्लंघनों में उत्पादों की गलत ब्रांडिंग और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, प्रतिबंधित या जहरीले खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन और उनकी बिक्री भी पाई गई है। पिछले छह महीनों से एफएसएसएआई ने खाद्य कारोबार संचालकों (एफबीओ) और ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ अपनी कार्रवाइयों को तेज किया है। नियामक इन कार्रवाइयों और उनके परिणामों के बारे में उपभोक्ताओं को सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से लगातार सूचित कर रहा है।
क्या हैं ई-कॉमर्स कंपनियों पर मुख्य आरोप?
ई-कॉमर्स मंचों पर कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें सबसे प्रमुख उत्पादों की गलत ब्रांडिंग का मामला है। कंपनियों द्वारा ऐसे दावे किए जा रहे थे जो ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ खाद्य उत्पाद ऐसे थे जिनकी बिक्री भारत में प्रतिबंधित है। इन प्रतिबंधित उत्पादों को भी मंचों पर बेचा जा रहा था। कुछ मामलों में जहरीले खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन और बिक्री भी इन उल्लंघनों का हिस्सा बनी।
एफएसएसएआई क्यों कर रहा है यह व्यापक कार्रवाई?
नियामक का मुख्य उद्देश्य देश में खाद्य सुरक्षा और मानकों को सुनिश्चित करना है। नियामक उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले छह महीनों से एफएसएसएआई ने अपनी निगरानी और प्रवर्तन गतिविधियों को काफी बढ़ाया है। यह वर्तमान कार्रवाई इसी व्यापक अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नियामक सोशल मीडिया के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को इन कार्रवाइयों और खाद्य सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूक कर रहा है।