वैश्विक वित्तीय प्रणाली की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था 'फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड' (एफएसबी) की एक समीक्षा रिपोर्ट में भारतीय बैंकिंग प्रणाली को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। संकटग्रस्त और विफल होते प्रणालीगत बैंकों को आपात स्थिति में तत्काल लिक्विडिटी (तरलता) प्रदान करने के लिए सार्वजनिक बैकस्टॉप फंड व्यवस्था तैयार करने के मामले में भारत और अर्जेंटीना अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने में विफल रहे हैं।
एफएसबी द्वारा 19 प्रमुख देशों व क्षेत्रों की विषयगत समीक्षा में बैंकों के आपातकालीन बैकस्टॉप फंडिंग तंत्र का मूल्यांकन किया गया। इस समीक्षा के आंकड़े बताते हैं कि संकट के समय सार्वजनिक धन का उपयोग किए बिना या राष्ट्रीयकरण के जोखिम से बचते हुए बैंकों के व्यवस्थित समाधान की व्यवस्था में बड़े अंतर मौजूद हैं:
समीक्षा में इस बात का परीक्षण किया गया कि जब बाजार से तरलता के सभी अन्य स्रोत समाप्त हो जाएं, तब अंतिम उपाय के रूप में सार्वजनिक प्राधिकरण बैंकों को अस्थायी आपातकालीन निधि प्रदान कर सकते हैं या नहीं।
यह वैश्विक समीक्षा वर्ष 2023 में अमेरिका में क्षेत्रीय बैंकों के विफल होने और स्विट्जरलैंड में क्रेडिट सुइस का यूबीएस द्वारा अधिग्रहण किए जाने की घटनाओं के बाद सामने आई है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कोई बैंक कितनी तेजी से गंभीर लिक्विडिटी तनाव का शिकार हो सकता है।
वित्तीय स्थिरता बोर्ड एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जो वैश्विक वित्तीय प्रणाली की निगरानी करता है और उसमें सुधार के लिए सिफारिशें करता है। इसकी स्थापना अप्रैल 2009 में जी 20 लंदन शिखर सम्मेलन के बाद की गई थी।
इसका मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय वित्तीय अधिकारियों और वैश्विक मानक तय करने वाले निकायों के काम में समन्वय स्थापित करना है ताकि प्रभावी नियामक और वित्तीय नीतियां लागू की जा सकें। इसका सचिवालय स्विट्जरलैंड के बेसल में स्थित है।
एफएसबी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि देशों को बैंक के विफल होने का इंतजार करने के बजाय संकट से पहले ही इस नियामक कमी को दूर कर लेना चाहिए। एफएसबी अपने सदस्य देशों को बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करके, कार्यान्वयन मार्गदर्शन की समीक्षा करके और प्रगति की निगरानी करके सहायता प्रदान करेगा। भारत जैसे देशों के लिए यह समीक्षा एक स्पष्ट चेतावनी है कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय प्रणालियों को झटकों से बचाने के लिए आपातकालीन लिक्विडिटी और बैंक रेजोल्यूशन के मजबूत सार्वजनिक ढांचे को जल्द से जल्द लागू करना अनिवार्य है।