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एफएसबी: 'डूबते बैंकों को बचाने की व्यवस्था बनाने में भारत-अर्जेंटीना विफल', 19 देशों की समीक्षा के बाद टिप्पणी

Fri, 09 Oct 2026 06:14 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एफएसबी नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत और अर्जेंटीना डूबते बैंकों के लिए आपातकालीन लिक्विडिटी फंड के वैश्विक मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। बैंकिंग प्रणाली पर इसके प्रभाव और पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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एफएसबी की रिपोर्ट में क्या? - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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वैश्विक वित्तीय प्रणाली की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था 'फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड' (एफएसबी) की एक समीक्षा रिपोर्ट में भारतीय बैंकिंग प्रणाली को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। संकटग्रस्त और विफल होते प्रणालीगत बैंकों  को आपात स्थिति में तत्काल लिक्विडिटी (तरलता) प्रदान करने के लिए सार्वजनिक बैकस्टॉप फंड व्यवस्था तैयार करने के मामले में भारत और अर्जेंटीना अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने में विफल रहे हैं। 

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एफएसबी की ओर से समीक्षा किए गए 19 प्रमुख देशों में से अधिकांश के पास डूबते बैंकों को करदाताओं के पैसे से राष्ट्रीयकरण किए बिना सुरक्षित तरीके से बंद करने या बेचने के लिए विश्वसनीय आपातकालीन फंडिंग तंत्र की कमी पाई गई है।

फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड की रिपोर्ट में भारत की स्थिति क्या है?

एफएसबी द्वारा 19 प्रमुख देशों व क्षेत्रों की विषयगत समीक्षा में बैंकों के आपातकालीन बैकस्टॉप फंडिंग तंत्र का मूल्यांकन किया गया। इस समीक्षा के आंकड़े बताते हैं कि संकट के समय सार्वजनिक धन का उपयोग किए बिना या राष्ट्रीयकरण के जोखिम से बचते हुए बैंकों के व्यवस्थित समाधान की व्यवस्था में बड़े अंतर मौजूद हैं:

  • विफल रहने वाले देश: 19 में से केवल दो देश- भारत और अर्जेंटीना- एफएसबी के सुरक्षा मानकों को पूरा करने में पूरी तरह असफल पाए गए हैं।
  • पूर्ण अनुपालन करने वाले क्षेत्र: केवल खर क्षेत्र- अमेरिका (यूएस), ब्रिटेन (यूके), जापान और हांगकांग- एफएसबी की सिफारिशों का पूरी तरह से अनुपालन करते हैं।
  • आंशिक अनुपालन करने वाले देश: कनाडा, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर को 'व्यापक रूप से अनुपालन' की श्रेणी में रखा गया है।
  • गैर-अनुपालन वाले देश: ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, यूरोपीय संघ (ईयू), इंडोनेशिया, सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और तुर्की 'सामग्री रूप से गैर-अनुपालन' की श्रेणी में पाए गए हैं।

डूबते बैंकों के लिए इमरजेंसी लिक्विडिटी बैकस्टॉप फंडिंग व्यवस्था क्यों जरूरी है?

समीक्षा में इस बात का परीक्षण किया गया कि जब बाजार से तरलता के सभी अन्य स्रोत समाप्त हो जाएं, तब अंतिम उपाय के रूप में सार्वजनिक प्राधिकरण बैंकों को अस्थायी आपातकालीन निधि प्रदान कर सकते हैं या नहीं। 

  • करदाताओं के नुकसान पर रोक: इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त बैंकों की आवश्यक वित्तीय सेवाओं को चालू रखते हुए उन्हें बेचना या बंद करना है, जिससे आम करदाताओं को नुकसान सीमित किया जा सके।
  • समय पर सहायता की कमी: एफएसबी की समीक्षा के अनुसार, आधे से भी कम देशों के पास ऐसे स्पष्ट और सक्षम तंत्र हैं जो किसी संकट के दौरान बैंक की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से पर्याप्त तरलता प्रदान कर सकें।
  • विशेषज्ञ की राय: समीक्षा की अध्यक्षता करने वाली बैंको डी एस्पाना की डिप्टी गवर्नर सोलेदाद नुनेज ने कहा, "एक विश्वसनीय सार्वजनिक क्षेत्र बैकस्टॉप फंडिंग तंत्र का होना अत्यंत आवश्यक है और एफएसबी की सिफारिशों को लागू करने के लिए तत्काल कार्य करने की आवश्यकता है।"

2023 के बैंकिंग संकट और स्विट्जरलैंड के अनुभव से क्या सीख मिलती है?

यह वैश्विक समीक्षा वर्ष 2023 में अमेरिका में क्षेत्रीय बैंकों के विफल होने और स्विट्जरलैंड में क्रेडिट सुइस का यूबीएस द्वारा अधिग्रहण किए जाने की घटनाओं के बाद सामने आई है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कोई बैंक कितनी तेजी से गंभीर लिक्विडिटी तनाव का शिकार हो सकता है।

  • तत्काल राहत बनाम स्थायी व्यवस्था: क्रेडिट सुइस संकट के दौरान स्विस नेशनल बैंक ने 168 बिलियन स्विस फ्रैंक की आपातकालीन लिक्विडिटी और ऋण सुविधाएं प्रदान की थीं।
  • कानूनी ढांचा लंबित: एफएसबी के अनुसार, स्विस केंद्रीय बैंक के इस बड़े हस्तक्षेप के बावजूद एक स्थायी सार्वजनिक लिक्विडिटी बैकस्टॉप का ढांचा अभी भी वहां की संसद में लंबित है, जो तत्काल हस्तक्षेप और स्थायी कानूनी तंत्र के अंतर को दर्शाती है।
  • अर्जेंटीना की आपत्तियां: दूसरी ओर, अर्जेंटीना के केंद्रीय बैंक ने इस मूल्यांकन पर असहमति जताते हुए दावा किया है कि उसके बैंकों का पूंजीकरण अंतरराष्ट्रीय औसत से अधिक है और वे तरलता मानकों को पूरा करते हैं।

एफएसबी क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?

वित्तीय स्थिरता बोर्ड एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जो वैश्विक वित्तीय प्रणाली की निगरानी करता है और उसमें सुधार के लिए सिफारिशें करता है। इसकी स्थापना अप्रैल 2009 में जी 20 लंदन शिखर सम्मेलन के बाद की गई थी।

इसका मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय वित्तीय अधिकारियों और वैश्विक मानक तय करने वाले निकायों के काम में समन्वय स्थापित करना है ताकि प्रभावी नियामक और वित्तीय नीतियां लागू की जा सकें। इसका सचिवालय स्विट्जरलैंड के बेसल  में स्थित है।

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भारत वित्तीय स्थिरता बोर्ड (एफएसबी) का एक सक्रिय और प्रमुख सदस्य है।। एफएसबी के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय में भारत को तीन सीटें प्राप्त हैं। इन तीन सीटों पर भारत का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर और सेबी के अध्यक्ष करते हैं। 

एफएसबी की भावी रूपरेखा क्या है?

एफएसबी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि देशों को बैंक के विफल होने का इंतजार करने के बजाय संकट से पहले ही इस नियामक कमी को दूर कर लेना चाहिए। एफएसबी अपने सदस्य देशों को बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करके, कार्यान्वयन मार्गदर्शन की समीक्षा करके और प्रगति की निगरानी करके सहायता प्रदान करेगा। भारत जैसे देशों के लिए यह समीक्षा एक स्पष्ट चेतावनी है कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय प्रणालियों को झटकों से बचाने के लिए आपातकालीन लिक्विडिटी और बैंक रेजोल्यूशन के मजबूत सार्वजनिक ढांचे को जल्द से जल्द लागू करना अनिवार्य है।

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