उन्होंने कहा है कि इस महामारी के कारण देश की आर्थिक वृद्धि दर एक फीसदी तक कम हो सकती है और रोजगार पर अलग प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जालान ने कहा कि देश की वृहत आर्थिक स्थिति पहले से संकट में है और उस पर कोरोना वायरस प्रभाव के कारण आर्थिक वृद्धि और नीचे जा सकती है।
राजकोषीय प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए
उन्होंने कहा कि, ‘‘कोरोना वायरस का असर अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत में भी है। भारत में आर्थिक वृद्धि दर प्रभावित होगी। रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या इस मौके पर सरकार को राजकोषीय प्रोत्साहन देना चाहिए, पूर्व सांसद जालान ने कहा कि राजकोषीय प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए और हमें राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को लेकर चिंतित नहीं होना चहिए। अगर यह लक्ष्य से ऊपर निकलता है तो कोई बात नहीं। क्योंकि अभी दूसरी चीजें ज्यादा जरूरी है। आपको पता है जब सुरक्षा का मामला आता है, आप ज्यादा पैसा खर्च करते हैं।’’
राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3 फीसदी
सरकार ने राजस्व में कमी को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3 फीसदी से बढ़ाकर जीडीपी का 3.8 फीसदी कर दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हर किसी ने अनुमान जताया है कि इससे जीडीपी वृद्धि में एक फीसदी की गिरावट आ सकती है।
दुनिया भर में संकट की स्थिति
जालान ने कहा, ‘‘यह दुनिया भर में संकट की स्थिति है। मुझे लगता है कि केंद्रीय बैंक पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुका है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि दो महीने पहले, उन्होंने नीतिगत दर में कटौती की थी। इसीलिए आरबीआई को विचार करना है कि देश के लिए इस समय बेहतर क्या है और वे उसके अनुसार निर्णय करेंगे ।’’