भारतीय बाजार में इस साल विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार दांव लगा रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण अगले साल होने वाले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने की संभावना है। यूबीएस सिक्योरिटीज ने अध्ययन में कहा है कि अधिकांश वैश्विक निवेशकों ने मोदी की जीत पर दांव लगाया है। हालांकि, दिसंबर तिमाही में कई राज्यों में होने वाले चुनावी नतीजों को उन्होंने पहले ही नजरअंदाज कर दिया है।
स्विस ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस सिक्योरिटीज ने 50 से अधिक अमेरिकी व यूरोपीय निवेशकों के साथ बैठक कर यह रिपोर्ट तैयार की है। भारत को लेकर आशावाद का एक अन्य कारण वृहद-आर्थिक जोखिमों में नरमी भी है।
भारत को मिलेगा चीन की रणनीति का लाभ
चाइना प्लस वन रणनीति के बारे में निवेशकों ने कहा, आपूर्ति शृंखलाओं के स्थानांतरित होने से भारत एक प्रमुख लाभार्थी के रूप में उभर सकता है। इस तरह के बहुत से लाभ संरचनात्मक सुधार करने की भारत की क्षमता पर निर्भर करेगा। यूबीएस ने निफ्टी का लक्ष्य इस साल के लिए घटाकर 18,000 कर दिया था। अभी यह इससे ऊपर कारोबार कर रहा है।
कम प्रदर्शन के बावजूद भरोसा
यूबीएस इंडिया की अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने कहा कि यह आशावाद इस साल अब तक उभरते बाजारों की तुलना में घरेलू बाजारों के 4.6 फीसदी कम प्रदर्शन के बावजूद है। यूबीएस इंडिया के रणनीतिकार सुनील तिरुमलाई ने कहा, यह आशावाद अपेक्षाकृत बेहतर आर्थिक, राजनीतिक और भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात मजबूत घरेलू प्रवाह की हकीकत है।