क्यों घटी अजीम प्रेमजी की संपत्ति
फोर्ब्स ने भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की सूची जारी कर दी है। लेकिन इस लिस्ट में जो चौंकाने वाला नाम दिख रहा है वो है अजीम प्रेमजी का। अजीम प्रेमजी पिछले साल तक भारत के दूसरे सबसे अमीर शख्स बने हुए थे लेकिन इस साल मे वो दूसरे पायदान से खिसक कर 17वें नंबर पर आ गए हैं।
अब अजीम जी के साथ ऐसा क्या हुआ कि वो एकाएक अमीरों की लिस्ट में इतने पिछड़ गए। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं लेकिन इनमें से जो बड़ी वजह सामने आ रही है वो है उनका दानवीर होना।
दान में दिए 52 हजार करोड़ रुपये के शेयर
अजीम प्रेमजी ने इसी साल मार्च में 52,750 करोड़ रुपये बाजार मूल्य के शेयर दान कर दिए हैं। प्रेमजी ने जो रकम दान की वह विप्रो लिमिटेड की 34 फीसदी हिस्सेदारी थी। इसके साथ प्रेमजी द्वारा परोपकार कार्य के लिए दान की गई कुल रकम 145,000 करोड़ रुपये यानी 21 अरब डॉलर हो गई, जोकि विप्रो लिमिटेड के आर्थिक स्वामित्व का 67 फीसदी है।
प्रेमजी के फाउंडेशन द्वारा एक बयान में कहा गया था कि, अजीम प्रेमजी ने अपनी निजी संपत्तियों का अधिक से अधिक त्याग कर और धर्माथ कार्य के लिए उसे दान देकर परोपकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाई है, जिससे अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के परोपकार कार्यो को सहयोग मिलेगा। अजीम प्रेमजी जितनी बड़ी मात्रा में दान कर रहे हैं उससे वो देश के सबसे बड़े दानवीर बन गए लेकिन शायद इसी वजह से उनकी तिजोरी भी खाली हो रही है।
2001 से कर रहे हैं दान
अजीम प्रेमजी साल 2001 से ही जरूरतमंदों को दान करना शुरू कर दिया था। 2013 में अपने संकल्प में प्रेमजी ने कहा था कि उनका यह मानना है कि जिन लोगों के पास दौलत है, उन्हें लाखों वंचित लोगों के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने की कोशिश में योगदान करना चाहिए। आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 1999 से 2005 तक अजीम प्रेमजी भारत के सबसे धनी व्यक्ति रह चुके हैं।
21 साल में शुरू की थी विप्रो
अजीम प्रेमजी ने मात्र 21 साल की उम्र में विप्रो लिमिटेड की शुरुआत की थी। शुरुआत में तो यह कंपनी साबुन तेल बेचा करती थी लेकिन धीरे-धीरे यह भारत की विशाल आईटी कंपनी बन गई। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक विप्रो 1999 तक इतनी बड़ी हो चुकी थी कि सिर्फ अपने 22 फीसदी शेयर बेचकर रिलायंस को खरीद सकती थी। आज विप्रो के दुनियाभर में एक लाख तीस हजार कर्मचारी हैं और इसकी 54 देशों में शाखाएं हैं।
सामाजिक कार्यों में सराहनीय योगदान के लिए साल 2005 में भारत सरकार के अजीम प्रेमजी को पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। देश के सबसे अमीर लोगों में शुमार अजीम प्रेमजी को हवाई जहाज की इकोनॉमी क्लास में सफर करना पसंद है। इसी साल 30 जुलाई को प्रेमजी ने विप्रो के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। अजीम के बाद उनके बेटे रिशद प्रेमजी ने कंपनी की कमान संभाली है।