लोकल इंडस्ट्री को मिलेगी मजबूती
संशोधित इलेक्ट्रॉनिकी विनिर्माण क्लस्टर (ईएमसी 2.0) योजना के तहत नई इकाइयां स्थापित होंगी। प्रमुख वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक निर्माताओं को आकर्षित करने के लिए लोकल इंडस्ट्री को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा खड़ा करने में मदद की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत पूरे देश में ईएमसी परियोजनाओं और सामान्य सुविधा केंद्रों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
इलेक्ट्रॉनिकी विनिर्माण क्लस्टर योजना में 3565 एकड़ के क्षेत्र की पैमाइश वाले 20 ग्रीनफील्ड ईएमसी और तीन कॉमन फैसिलिटी सेंटर के लिए आईएनआर 3898 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत, जिसमें आईएनआर 1.577 करोड़ की सरकारी अनुदान सहायता भी शामिल है, अनुमोदित की गई है। स्टार्टअप और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौधोगिकी के क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों को जोखिम पूंजी प्रदान की जाएगी। इस राशि से अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा।55 सौ करोड़ रुपये के लक्षित कोष के साथ ईडीएफ के माध्यम से 11 डॉटर फंड के लिए आईएनआर 659 करोड़ रुपये का कोष प्रतिबद्ध किया गया है।
मोबाइल हैंडसेट और उसके सब असेंबली पार्ट्स निर्माण में घरेलू संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम शुरु किया गया है। टैरिफ संरचना को इलेक्ट्रॉनिक सामानों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए युक्तिसंगत बनाया गया है। इसमें सेलुलर मोबाइल हैंडसेट, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक घटक, सेट टॉप बॉक्स, एलईडी उत्पाद और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण शामिल है।
मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने और आय व रोजगार बढ़ाने के मकसद से भारत में वस्तुओं एवं सेवाओं के विनिर्माण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सार्वजनिक क्रय (मेक इन इंडिया को वरियता) आदेश जारी किया गया है। भारत में घटिया और असुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक सामानों के आयात पर अंकुश लगाकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य अनुपालन के रूप में सीआरओ के तहत 44 उत्पाद श्रेणियों को अधिसूचित किया गया है। आरएंडडी को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर में बड़े क्षेत्र वाले लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है।