उत्पादन 52 फीसदी तक घटने की आशंका
कृषि पर जलवायु परिवर्तन के असर पर 2016 में जारी सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, तापमान में 2.5 से 4.9 फीसदी डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी से गेहूं की पैदावार में 41 से 52 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। हालिया शोध में पता चला है कि भारत में गंगा के मैदानी इलाकों में दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादन होता है। इन इलाकों में भी गर्मी का असर दिखेगा।
जून, 2021 में प्रकाशित नॉर्वे के ओस्लो में सेंटर फॉर इंटरनेशनल क्लाइमेट रिसर्च में कहा गया कि भारत में गंगा के मैदानी इलाकों पर जलवायु परिवर्तन का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष असर हो रहा है। प्रत्यक्ष प्रभाव के कारण गेहूं उत्पादन एक से 8 फीसदी के बीच घटने और अप्रत्यक्ष असर की वजह से 4 से 36 फीसदी तक कम होने की आशंका है।
30 फीसदी ज्यादा पानी की खपत
हरियाणा के करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के प्रमुख जीपी सिंह का कहना है कि अत्यधिक तापमान के कारण गेहूं का उत्पादन घटा है, लेकिन यह इतनी तेज नहीं है। उन्होंने बताया कि गेहूं उत्पादन 10.9 करोड़ टन हुआ है। इस बीच, लगातार बढ़ते तापमान के कारण कृषि क्षेत्र को और संसाधनों की जरूरत पड़ने वाली है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अध्ययन के अनुसार, आंध्र प्रदेश, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में ‘उच्च वाष्पीकरणीय मांग’ के कारण खेती में 30 फीसदी अधिक पानी की खपत होती है।