वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की विकास समिति में कहा कि तेज वृद्धि के अनुमानों के बाद भी भारत वैश्विक आर्थिक हालात पर चिंतित है। दुनिया जिन आर्थिक मुसीबतों से जूझ रही है, उनसे निपटने के लिए विश्व बैंक समूह (डब्ल्यूबीजी) को बड़ा और बेहतर बनने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, बाधित आपूर्ति शृंखलाओं की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है। खासतौर पर विकासशील दुनिया में गरीबों, वंचितों और हाशिए पर रहने वालों को सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
विकसित देशों में मुद्रास्फीति, मुद्रा के अवमूल्यन और लगातार बढ़ती ब्याज दरों ने हालात को और जटिल बना दिया है। विश्व बैंक समूह और विकसित देशों को आइना दिखाते हुए उन्होंने सलाह दी कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए जन केंद्रित, आम सहमति आधारित और सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। ये हालात बहुपक्षवाद के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। लिहाजा, डब्ल्यूबीजी को बड़ा और बेहतर बनकर वैश्विक चुनौतियों का हल खोजने में मदद करना चाहिए।
दुनिया को गरीबी से उबारने पर सर्वाधिक जोर देना आवश्यक
वित्त मंत्री ने कहा, डब्ल्यूबीजी को गरीबी मुक्त विश्व बनाने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अत्यधिक गरीबी खत्म करने व साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के दोहरे लक्ष्यों पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा, इन दोहरे लक्ष्यों को समावेशी बनाते हुए प्राप्त किया जाए, ताकि सभी तक लाभ पहुंच सकें। यह बदलाव सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय नजरिये से टिकाऊ हो, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को इसका लाभ मिले।
अल्प कार्बन वृद्धि पर जोर
वित्त मंत्री ने कहा, विकसित देशों ने वादा करने के बाद भी जलवायु परिर्वतन से उबरने के लिए जरूरी वित्तीय व तकनीकी मदद मुहैया नहीं कराई है। लेकिन, फिर भी भारत अल्प कार्बन वृद्धि पर जोर दे रहा है।
चुनौतियों के बावजूद बढ़ रही भारत की आर्थिक वृद्धि
सीतारमण ने विकास समिति को बताया कि चुनौतियों और विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत की विकास दर 6 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान है। नियंत्रित चालू खाता घाटे और तीव्र विकास दर के साथ ही आशावादी कारोबारी माहौल से भारत ने इस आर्थिक मजबूती को हासिल किया है।