वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार कोबाजारों में संभावित गुटबंदी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसका पता लगाने की जरूरत है, ताकि इस चुनौती से निपटा जा सके। साथ ही कमोडिटी की आपूर्ति में भी कमी हो रही है। इसे भी देखा जाना चाहिए। बढ़ती महंगाई ने कोरोना से आर्थिक सुधार में चिंता पैदा की है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ शिकायतें हैं कि बड़ी क्षमता वाले देश भारत में सामग्रियों की इनपुट लागत बढ़ गई है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के 13 वें वार्षिक कार्यक्रम में कहा कि कमोडिटी की लगातार बढ़ रही कीमतों के पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं, पर जिस पर ध्यान देने की जरूरत है वह यह कि इसकी आपूर्ति में कमी क्यों हो रही है। उनकी इन बातों को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश में खुदरा और थोक महंगाई कई सालों के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई हैं।
आपूर्ति की कमी पर धयान देना चाहिए
निर्मला सीतारमण ने कहा कि कमोडिटी और कच्चे माल की पूरी दुनिया में कमी है और साथ ही पूर्वी यूरोप में महामारी और युद्ध की स्थिति के कारण वैल्यू चेन और आपूर्ति के साथ तमाम अड़चनें हैं। ऐसे कई चरण हैं जिनमें व्यवधान आ रहे हैं। इन्हें देखना चाहिए कि ये कोरोना की वजह से आ रहे हैं या फिर युद्ध के कारण हो रहे हैं। ऐसे में आपूर्ति की कमी पर ध्यान देकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी ऐसा एकाधिकार न हो, जिससे कीमतें बढ़ें या आपूर्ति में गुटबंदी हो।
कीमतों के पीछे कई और कारण हो सकते हैं
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियां हो सकती हैं, जहां गुटबंदी एक संभावित खतरा है, पर अन्य चीजें भी हैं, जिनकी वजह से वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। सरकार चाहती है कि महामारी के बाद से सुधार स्पष्ट हो और तेज हो। साथ ही कंपनियों के पास नई चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता भी हो। कंपनियां हमारे सामने बढ़ेंगी और यह होगा भी। इसलिए सीसीआई को इस बात की ज्यादा समझ होनी चाहिए कि यह क्या हो रहा है और यह विस्तार किस ओर ले जा रहा है।
कंपनियां संवेदनशील बनें
सीतारमण ने कहा कि पिछले दो वर्षों से सीसीआई ज्यादा सकारात्मकता के साथ चुनौतियों से निपटी है। चुनौतियां ज्यादा जटिल होती जा रही हैं। यह तकनीक आधारित भी हैं। इसलिए आयोग के पास ऐसी क्षमता होनी चाहिए कि वह इस तरह की चुनौतियों से निपट सके। उन्होंने कहा कि साथ-साथ कंपनियों को भी संवेदनशील बनने की जरूरत है।
विलय और अधिग्रहण को भी समझने की जरूरत
मंत्री ने कहा कि विलय और अधिग्रहण के नाम पर क्या हो रहा है, नियामक को इसे भी समझने की आवश्यकता है। मैं यह नहीं कह रही हूं कि आप जो समझ रहे हैं, उस आधार पर इसमें सीधे शामिल हो जाएं, पर जानकारी आपको रखनी चाहिए। इससे मामलों को हल करने में सुविधा होगी।
डिजिटलाइजेशन पर भी ध्यान दें
निर्मला सीतारमण ने कहा कि डिजिटलाइजेशन की वजह से चुनौतियां हैं और प्रतिक्रियाएं भी हैं। यह दोनों हमारे सामने हकीकत हैं। डिजिटल उपकरण बाजार की ताकतें हैं जिनका उपयोग ग्राहकों के फायदे के लिए होना चाहिए। इसका निष्पक्ष पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से करना चाहिए। लेकिन एक सवाल जो उठता है वह यह कि विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटलीकरण का सबसे अच्छा प्रभाव कैसे पड़ रहा है, इसलिए संवेदनशील बनने की जरूरत है।