फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Finance Minister: निर्मला सीतारमण बोलीं- भारतीय कंपनियां हनुमान की तरह, उन्हें अपनी ताकत का अंदाजा नहीं

Wed, 14 Sep 2022 02:05 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

वित्त मंत्री ने मंगलवार को एक कार्यक्रम कहा कि सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करने को इच्छुक है और सभी तरह की समस्याओं को भी दूर करेगी। उन्होंने घरेलू कंपनियों से कहा कि आप अपनी क्षमता पर भरोसा कीजिए। आप हनुमान हैं, यह कौन बताएगा? यह सरकार का काम नहीं है। आप अपनी ताकत में भरोसा नहीं करते हैं।
विज्ञापन
Finance Minister Nirmala Sitharaman - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत की तुलना हनुमान से करने के साथ उन पर निशाना भी साधा। उन्होंने घरेलू कंपनियों से पूछा कि जब विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा है तो ऐसे में कॉरपोरेट जगत विनिर्माण में निवेश से पीछे क्यों हट रहा है। आखिर ऐसा क्या कारण है जो उन्हें निवेश से रोक रहा है।

विज्ञापन


उन्होंने घरेलू कंपनियों से कहा कि आप अपनी क्षमता पर भरोसा कीजिए। आप हनुमान हैं, यह कौन बताएगा? यह सरकार का काम नहीं है। आप अपनी ताकत में भरोसा नहीं करते हैं। वित्त मंत्री ने मंगलवार को एक कार्यक्रम कहा कि सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करने को इच्छुक है और सभी तरह की समस्याओं को भी दूर करेगी। इस तर्ज पर सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को भी शुरू किया है। इसके साथ कर की दरों में कटौती कर घरेलू उद्योगों को विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए भी प्रोत्साहित किया है। 
सब कुछ करेंगे, पर घरेलू कंपनियां जवाब दें
वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी नीति का अपने आप में अंत नहीं हो सकता है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं यह विकसित होती रहती है। मैं भारतीय उद्योग जगत से यह जरूर जानना चाहूंगी कि आखिर वे क्यों निवेश से झिझक  रहे हैं। हम उद्योगों को यहां लाने और निवेश करने के लिए सब कुछ करेंगे। पर यह बताना होगा कि आपको कौन सी चीज रोक रही है।
विज्ञापन


विदेशी निवेशक लगातार निवेश कर रहे 
निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशी कंपनियां और देशों को लगता है कि भारत अब बेहतर  स्थान है और यह एफडीआई और एफपीआई के निवेश में भी दिख रहा है। साथ ही शेयर बाजार के निवेशकों में भी विश्वास दिख रहा है। उन्होंने हनुमान की संज्ञा देते हुए कहा कि आप अपनी क्षमता पर विश्वास कीजिए। हालांकि, आप हनुमान हैं यह कौन बताएगा? यह सरकार का काम नहीं है। आप अपनी ताकत में विश्वास नहीं करते हैं। 

कई देश रुपये में द्विपक्षीय कारोबार करने को इच्छुक
सीतारमण ने कहा कि हाल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रुपये में कारोबार के तरीके को घोषित करने के बाद कई देश भारत के साथ रुपये में द्विपक्षीय कारोबार करने को इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि यह रूबल और रुपया नहीं है जो पुराने प्रारूप में था। आरबीआई ने ऐसे समय में यह तरीके लाया है, जो काफी महत्वपूर्ण है। 

भारत रुपये का बचाव नहीं कर रहा -सीईए
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत रुपये की गिरावट को बचाने के लिए कोई कोशिश नहीं कर रहा है। मुझे नहीं लगता है कि भारतीय बुनियादी चीजें ऐसी हैं कि हमें रुपये की रक्षा करने की जरूरत है। रुपया खुद देखभाल कर सकता है। आरबीआई इसके लिए जरूरी कदम उठा रहा है कि रुपया का प्रबंधन अर्थव्यवस्था के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है। 

नागेश्वरन ने कहा कि आरबीआई यह सुनिश्चित कर रहा है कि बाजार के रुझान के अनुरूप रुपया जिस भी दिशा में आगे बढ़ रहा है वह धीरे-धीरे हो और आयातकों या निर्यातकों पर बोझ न पड़े। अगस्त में डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 80.15 पर पहुंच गया था जो अभी 79.25 पर है। 

विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट पर उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचाव का रूख पूंजी को यहां आने से रोक रहा है। निश्चित रूप से इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ रहा है। 2 सितंबर को विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 554 अरब डॉलर हो गया था जो 2020 के बाद सबसे कम है। 

इस दशक में 7 फीसदी की दर से बढ़ सकती है अर्थव्यवस्था
नागेश्वरन ने कहा कि इस दशक में भारत की अर्थव्यवस्था सालाना 7 फीसदी की दर से बढ़ने में सक्षम हो सकती है। निवेश पर खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी रफ्तार है। अप्रैल-जून में इसमें13.5 फीसदी की बढ़त दिखी थी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का रुझान भले ही 6 फीसदी की वृद्धि दिखा रहा हो, पर हमारा मानना है कि यह सात फीसदी की दर से होगी। 

एशियाई देशों के लिए महंगाई और आपूर्ति सबसे बड़ा जोखिम
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मंगलवार को कहा कि उभरते हुए एशियाई देशों के लिए अगले 12-18 महीने में महंगाई और आपूर्ति में बाधा सबसे बड़ा जोखिम है। इन देशों में भारत, इंडोनेशिया, मलयेशिया, फिलीपींस, चीन, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। एक सर्वे में इसने कहा कि इन दोनों जोखिम के अलावा बढ़ती ब्याज दरें और अर्थव्यवस्था में धीमी वृद्धि दर भी जोखिम ही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें