कोरोना संकट के दौरान आर्थिक एवं कारोबारी गतिविधियां ठप पड़ने का असर नौकरियां पर भी दिखा है। हर क्षेत्र में छंटनी हुई है, जिससे न सिर्फ लोगों के दैनिक खर्च प्रभावित हुए हैं बल्कि उनका वित्तीय प्रबंधन भी बिगड़ गया है। वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि संकट की इस घड़ी में नौकरी छूटने के बावजूद सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
इस दौरान लोगों को वित्तीय प्रबंधन पर ज्यादा जोर देना चाहिए। खर्च पर नियंत्रण के साथ सख्त बजट बनाना चाहिए। अनावश्यक खर्च से बचने के लिए जरूरी और गैर-जरूरी खर्चों की श्रेणी बनाएं, क्योंकि गैर-जरूरी खर्चों के कारण ही सबसे ज्यादा वित्तीय बोझ पड़ता है। कठिन समय में इस बोझ से बचने के लिए वित्तीय प्रबंधन के पांच तरीके अपना सकते हैं।
1. खर्चों पर नियंत्रण जरूरी
ऐसे वक्त में वित्तीय प्रबंधन के लिए अपने खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। इसलिए खर्च करने की आदतों की समीक्षा करें और एक सख्त बजट बनाएं। अपने सभी खर्चों को जरूरी एवं गैर-जरूरी श्रेणी में वर्गीकृत करें। किराने का सामान, किराया और उपयोगिता वाले खर्चों को प्राथमिकता श्रेणी में रखें। बाहर जाकर खाना, सैर-सपाटा और लग्जरी वस्तुओं की खरीदारी जैसे गैर-जरूरी खर्चों से बचना चाहिए। इसके अलावा, बुनियादी खर्च को कम करने का एक तरीका सस्ते किराये के मकान में चले जाना है, क्योंकि वेतन का बड़ा हिस्सा किराये और बिजली-पानी आदि के बिलों पर खर्च होता है।
2. आपातकालीन बचत का इस्तेमाल करें
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि भविष्य को देखते हुए हर किसी को आपातकालीन बचत करनी चाहिए। संकट के दौरान इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। एक आदर्श आपातकालीन फंड से 6-12 महीने का खर्च आसानी से चल जाता है। कुल कोष का 10-15 फीसदी राशि नकद के रूप में रखा जा सकता है। बाकी रकम को निवेश योजनाओं में लगा सकते हैं, जिस पर न सिर्फ रिटर्न मिलेगा बल्कि जरूरत पड़ने पर आप नकदी के रूप में उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
3. अनावश्यक और ज्यादा कर्ज से बचें
अगर आपके पास आपातकालीन फंड नहीं है तो नौकरी छूटने के बाद दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए कर्ज लेना ही आखिरी विकल्प बचता है। ऐसे हालात में अनावश्यक और ज्यादा कर्ज लेने से बचें। अगर आपके पास पारंपरिक बीमा पॉलिसी या पीपीएफ होल्डिंग्स जैसे निवेश हैं तो इस पर कर्ज ले सकते हैं। पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने से पहले ब्याज की तुलना जरूर करें।
4. सेवानिवृत्ति फंड से निकासी आखिरी विकल्प
नौकरी छूटने के बाद अपने सेवानिवृत्ति फंड का इस्तेमाल आखिरी विकल्प में रूप में करें। अगर आप दैनिक खर्चों के लिए इससे निकासी करते हैं तो लंबी अवधि में बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए बेहतर है कि दूसरी नौकरी मिलने तक अपने आपातकालीन फंड का इस्तेमाल करें।
5. बंद न करें स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी
नौकरी छूटने के बावजूद किसी भी हालत में सेहत के साथ समझौता न करें। इसलिए जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को बंद करने से बचें। कोरोना महामारी जैसे संकट के दौरान स्वास्थ्य और परिवार की वित्तीय जिम्मेदारियों को देखते हुए दोनों की महत्ता और बढ़ जाती है। समय पर अपने प्रीमियम का भुगतान करते रहें। वित्तीय बोझ से बचने के लिए आप प्रीमियम के मासिक भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं।
कौशल एवं शौक को बनाएं कमाई का जरिया
नौकरी छूटने पर दैनिक खर्च चलाने की मुश्किलों से बचने के लिए अपने कौशल एवं शौक को कमाई का जरिया बनाएं। इसके लिए फ्रीलांस कर सकते हैं। कंसल्टेंट के रूप में सेवाएं देकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। इससे न सिर्फ कुछ खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी बल्कि कर्ज आदि का बोझ भी नहीं बढ़ेगा।
-अतुल गर्ग, टैक्स एवं निवेश सलाहकार