कोरोना वायरस महामारी के चलते निजी खपत कमजोर पड़ने और निवेश में कमी को देखते हुए एजेंसी ने यह कदम उठाया है। कोरोना वायरस का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर देखा जा रहा है। फिच ने मंगलवार को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के 4.9 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्ति किया हुआ है।
इस संदर्भ में फिच सोल्यूशंस ने कहा कि, ‘‘वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 4.6 रहने का अनुमान है जबकि पूर्व में इसके 5.4 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। हमने 2019-20 में 4.9 फीसदी आर्थिक वृद्धि अनुमान के जरिए जो नरमी की बात कही थी, वह अब दिखाई दे रही है।’’
निजी खपत में वृद्धि प्रभावित होने की आशंका
फिच सोल्यूशंस ने कहा कि पिछले सप्ताह घोषित 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के बावजूद आने वाले महीनों में निजी खपत में वृद्धि प्रभावित होने की आशंका है। एजेंसी के अनुसार, वृद्धि का अनुमान कम करने का कारण निजी खपत में कमी तथा निवेश में गिरावट है। हालांकि, शुद्ध रूप से निर्यात योगदान अधिक होने और उच्च सरकारी खपत से कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में मदद मिलनी चाहिए।
उसने यह भी कहा कि भारत में कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को देखते हुए अनुमान के और नीचे आने का जोखिम है। ऐसी आशंका है कि कोरोना वायरस के जो मामले दिख रहे हैं, वो अपेक्षाकृत कम हैं और यह फिलहाल शुरूआत लगती है।
मूडीज ने भी घटाया था अनुमान
पिछले सप्ताह वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कैलेंडर वर्ष 2020 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अपने पहले के अनुमान को घटा कर 2.5 फीसदी कर दिया था। पहले उसने इसके 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। कोरोना वायरस और उसके चलते देश दुनिया में आवागमन पर रोक के मद्देनजर आर्थिक लगत बढ़ी और इसी वहज से देश की वृद्धि दर घटने का अनुमान है। वर्ष 2019 में वृद्धि पांच फीसदी रहने का आकलन है। वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है।
S&P ने इतना जताया था अनुमान
S&P ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने 2020 में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 5.2 फीसद कर दिया है। S&P की तरफ से यह भी कहा गया है कि कोरोनावायरस महामारी के चलते दुनियाभर की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में जा रही है। यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एजेंसी ने 2020 में भारत के जीडीपी ग्रोथ को 5.7 फीसद की रेटिंग दी थी।
बार्कलेज ने घटाया वृद्धि दर का अनुमान
शोध-सलाह कंपनी बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए वृद्धि दर के अनुमान में 1.7 फीसदी की कटौती कर इसके 3.5 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया था। उसने कहा था कि, 'हमारा अनुमान है कि राष्ट्रव्यापी बंदी की कीमत करीब 120 अरब डॉलर यानी जीडीपी के चार फीसदी के बराबर रह सकती है।'