सरकार द्वारा तय समय से पहले बजट पेश करने के निर्णय को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय के बजट डिवीजन ने एक तरफ जहां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को अनुमान (एस्टिमेट) तय करने के बारे में पत्र भेज दिया है, वहीं प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर विभाग ने भी उद्योग एवं वाणिज्य जगत के साथ बैठक करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन सबके साथ अगले सोमवार से वित्त मंत्रालय में बैठक शुरू हो रही है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रिमंडल से वित्त वर्ष 2017-18 के बजट को एक महीने पहले पेश करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के दो दिन बाद ही बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के बारे में सर्कुलर जारी हो गया था। इसके बाद मंत्रालय के बजट डिवीजन से केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों को बीते वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान और अगले वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान तय करने के बारे में बैठक की चिट्ठी भेज दी गई है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर विभाग की तरफ से उद्योग एंव व्यापार जगत के प्रतिनिधियों को अधिकारियों के साथ बैठक के लिए पत्र भेज दिया गया है। उनके मुताबिक, आगामी 17 अक्टूबर से बैठक शुरू हो रही है। यह जल्दबाजी इसलिए की जा रही है ताकि जनवरी के पहले पखवाड़े तक बजट को अंतिम रूप दे दिया जाए।
तारीख तय करने में चुनावों का भी रखा जाएगा ध्यान
अगले साल का बजट समय से करीब एक महीने पहले पेश करने का जब फैसला हुआ था, उसी समय वित्त मंत्री, अरुण जेटली ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि अगले साल की शुरुआत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। इसलिए बजट की तिथि तय करने से पहले यह देखा जाएगा कि विधानसभा चुनावों के बीच बजट पेश नहीं किया जाए। उल्लेखनीय है कि अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
विधायी मंजूरी प्रक्रिया अप्रैल से पहले पूरी करना है उद्देश्य
सरकार का कहना है कि फरवरी माह के अंतिम दिन बजट पेश किए जाने की औपनिवेशिक काल से चली आ रही परंपरा को समाप्त कर इसे एक महीने पहले पेश करने का फैसला किया गया। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सालाना खर्च योजना और कर प्रस्ताव के लिए विधायी मंजूरी प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू नए वित्त वर्ष से पहले पूरी हो जाए। इस समय पूरी प्रक्रिया जून तक पूरी होती है और तब तक मानसून आ जाता है, जिससे प्रभावी तौर पर व्यय अक्तूबर से शुरू होता है। सरकार चाहती है कि व्यय अप्रैल से ही शुरू हो ताकि ज्यादा से ज्यादा काम दिखे।
इसी साल से रेल बजट को भी आम बजट में समाहित करने का फैसला लिया गया है। अब रेलवे का बजट आम बजट से पहले नहीं आएगा। इसका भी बजट अन्य मंत्रालयों की तरह आम बजट में ही शामिल होगा।