टैरिफ वार और दुनिया के कई देशों में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर उत्पन्न जोखिमों से निपटने के लिए भारत को निजी निवेश में तेजी लाने की जरूरत है। इससे देश को बाहरी कारणों से आर्थिक वृद्धि के रास्ते में उत्पन्न चुनौतियों को दूर करने में मदद मिल सकती है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा, निजी क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती और इसके निरंतर आगे बढ़ने से बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसलिए, यह आवश्यक है कि उद्योग अपने निवेश खर्च और उपभोग मांग के बीच सह-संबंध को पहचाने।
आर्थिक मामलों के विभाग ने मासिक आर्थिक समीक्षा के फरवरी संस्करण में कहा, आयकर में राहत और रेपो दर में कटौती से उपभोग बढ़ने की उम्मीद है। निजी क्षेत्र को इन कदमों से संकेत लेकर क्षमता विस्तार की दिशा में निवेश करना शुरू करना चाहिए। इसमें कहा गया है कि भारत की ठोस बुनियाद और आर्थिक संभावनाओं पर केंद्रित निजी क्षेत्र का पूंजी निर्माण नए वित्त वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण चालक होगा।
मुश्किलों के बावजूद 6.5% की दर से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था
मंत्रालय ने कहा, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 2024-25 की तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि में तेजी आई है। पूरे चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 6.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है। इसकी वजह है...निजी खपत में सुधार और निर्यात में वृद्धि। कृषि गतिविधियों में तेजी से ग्रामीण मांग को समर्थन मिला है। सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। चुनावों के बाद सरकारी खर्च में तेजी, ई-वे बिल में दहाई अंक में वृद्धि और महाकुंभ मेले से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों से 2024-25 की चौथी तिमाही में वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बजट में दीर्घकालिक विकास पर जोर
आयकर ढांचे में प्रस्तावित बदलावों से मध्य वर्ग के खर्च योग्य आय में सुधार होगा, जिससे उनकी खपत बढ़ने की उम्मीद है। फरवरी में रेपो दर में 0.25 फीसदी कटौती करने के साथ नकदी बढ़ाने के अधिक उदार मौद्रिक उपाय आर्थिक वृद्धि की गति को बढ़ा सकते हैं। केंद्रीय बजट में दीर्घकालिक विकास को गति देने के उपायों और सुधारों पर ध्यान दिया गया है, जो कि विकसित भारत की महत्वाकांक्षा के इर्द-गिर्द है। यह महत्वपूर्ण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू आर्थिक मजबूती को लेकर भरोसे को बढ़ाता है।
रिकॉर्ड अनाज उत्पादन से घटेगी महंगाई
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण महंगाई फरवरी में सात महीने के निचले स्तर पर आ गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में अनाजों के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद से आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई को कम करने में मदद मिलेगी।
निर्यात और एफडीआई में मजबूती
बाहरी मोर्चे पर प्रमुख वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली है, जो चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अप्रैल-फरवरी के बीच 8.2 फीसदी की दर से बढ़ा है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मजबूत बना हुआ है। कुल एफडीआई 2024-25 में अप्रैल से जनवरी के दौरान 12.4 फीसदी बढ़ा है।
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