वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क से मुलाकात की। इस दौरान भारत-आईएमएफ संबंधों, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत की आर्थिक वृद्धि पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। क्लार्क ने भारत के आर्थिक प्रदर्शन और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के प्रयासों की सराहना की।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और आईएमएफ के बीच द्विपक्षीय जुड़ाव पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य के परिदृश्य पर भी गहन विचार-विमर्श किया।
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बैठक के दौरान, सीतारमण और क्लार्क ने भारत-आईएमएफ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। क्लार्क ने दक्षिण एशिया क्षेत्रीय प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता केंद्र (SARTTAC) को भारत के समर्थन की सराहना की। दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक सहयोग बढ़ाने में भारत-आईएमएफ के निरंतर जुड़ाव के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सुदृढ़ नीतियों का समर्थन करने और क्षेत्रीय व वैश्विक आर्थिक लचीलेपन में योगदान देने की बात कही।
चर्चा में भारत की बढ़ती वृद्धि की दिशा और वैश्विक आर्थिक वातावरण में हो रहे बदलाव भी शामिल रहे। इसमें भारत का व्यापार एजेंडा और वैश्विक व्यापार प्रणाली में हो रहे विकास पर भी बात हुई। हाल ही में हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभाव पर भी चर्चा की गई। इन समझौतों को भारत की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना गया। क्लार्क ने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत के आर्थिक प्रदर्शन, लचीलेपन और वृद्धि के रिकॉर्ड को स्वीकार किया।
क्या भारत की आर्थिक वृद्धि की सराहना हुई?
आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि की प्रशंसा की। उन्होंने देश के आर्थिक प्रदर्शन और लचीलेपन को विशेष रूप से सराहा। क्लार्क ने भारत के वृद्धि के रिकॉर्ड को वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उल्लेखनीय बताया। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत की यह प्रगति वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी गई।
सरकार के प्रयासों को क्यों सराहा गया?
क्लार्क ने सरकार के राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने पश्चिम एशियाई संकट के बाद अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए उठाए गए कदमों की प्रशंसा की। ये उपाय भारत की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुए हैं। आईएमएफ ने भारत की नीतियों को वैश्विक आर्थिक लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण माना। इन प्रयासों से भारत की अर्थव्यवस्था को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मजबूती मिली है।