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त्योहारों पर सुपरफास्ट डिलीवरी: क्विक कॉमर्स से बदलेगा ऑनलाइन शॉपिंग का अनुभव, जानें यह क्यों बन रहा गेमचेंजर

Mon, 07 Sep 2026 04:33 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

त्योहारों पर शुरू हुआ क्विक कॉमर्स का धमाका! जानिए कैसे 10 मिनट की डिलीवरी बदल रही है भारत का शॉपिंग गेम। बाजार की पूरी रिपोर्ट और रोजगार के नए अवसरों के लिए अभी पढ़ें।
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क्विक कॉमर्स - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारत में त्योहारों का सीजन शुरू होते ही ऑनलाइन शॉपिंग का पूरा ढांचा बदलने वाला है। 10 मिनट में डिलीवरी करने वाले क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने इस साल बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। ये अब राशन-सब्जी के दायरे से बाहर निकल चुके हैं। इस बार पूजा सामग्री के अलावा कपड़े, स्मार्टफोन, ब्यूटी किट्स और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी चंद मिनटों में डिलीवर होने के लिए तैयार हैं।

क्यों गेम चेंजर बन रहा है क्विक कॉमर्स?

पारंपरिक ई-कॉमर्स जहां डिलीवरी के लिए दो-तीन दिन लेते हैं, वहीं क्विक कॉमर्स किराने से आगे बढ़कर नए सेक्टर्स पर कब्जा कर रहा है। जेप्टो के सीबीओ देवेंद्र मील के मुताबिक, त्योहारों पर विशेष फेस्टिव 'स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स' (एसकेयू) पेश हो रहे हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, ग्राहक अब क्विक कॉमर्स से इलेक्ट्रॉनिक्स और तुरंत जरूरत के सामान खरीदने लगे हैं। हालांकि, अधिक विकल्प और तुलना के लिए पारंपरिक ई-कॉमर्स ही मजबूत रहेगा।

क्या ग्राहकों के बजट पर पड़ेगा असर?

त्योहारों पर मांग मजबूत रहेगी, लेकिन बढ़ती कीमतों का असर खरीदारों के व्यवहार पर साफ दिख रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के एनालिस्ट शुभम निमकर का कहना है कि इस सीजन में वैल्यू (मूल्य) के लिहाज से बिक्री अच्छी रहेगी, लेकिन वॉल्यूम (बिक्री की संख्या) में ज्यादा तेज बढ़त नहीं होगी। मेमोरी की बढ़ती लागत से स्मार्टफोन महंगे हो रहे हैं। ऐसे में ग्राहक बड़ी सेल और छूट का इंतजार करेंगे। यानी प्रीमियम सामान की मांग बनी रहेगी, पर आम ग्राहक सावधानी बरतेंगे।

मेट्रो और छोटे शहरों की पसंद में क्या अंतर है?

स्नैपडील के सीईओ अचिंत सेतिया के मुताबिक, क्विक कॉमर्स मुख्य रूप से मेट्रो शहरों में तुरंत जरूरत पूरी करने पर केंद्रित है, जबकि छोटे (नॉन-मेट्रो) शहरों में ग्राहक ज्यादा सोच-समझकर और तुलना के बाद खरीदारी करते हैं। उनके ग्राहकों में 'वैल्यू-सीकिंग' (सही कीमत पर बेहतर क्वालिटी) सबसे प्रमुख है। स्नैपडील की 80% से ज्यादा बिक्री छोटे शहरों से आती है। वहीं, मीशो के मुताबिक रक्षाबंधन के दौरान उसके 73% ऑर्डर्स नॉन-मेट्रो बाजारों से आए थे।

शॉपिंग में क्या है एआई का रोल?

त्योहारी खरीदारी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जबर्दस्त इस्तेमाल हो रहा है। स्नैपडील के मुताबिक, उसके 76% ऑर्डर्स किसी न किसी रूप में AI से प्रभावित होते हैं। 'स्नैप एंड शॉप' इमेज-बेस्ड टूल ग्राहकों को फोटो के जरिए चीजें खोजने में मदद करता है।  वहीं, मीशो भी एआई आधारित डिस्कवरी सिस्टम का उपयोग करके स्थानीय ट्रेंड्स के हिसाब से ग्राहकों को सुझाव दे रहा है।

रोजगार के मोर्चे पर क्या है खुशखबरी?

बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों ने रोजगार के बंपर अवसर पैदा किए हैं। अमेजन इंडिया ने 1.6 लाख से ज्यादा मौसमी नौकरियां दी हैं, जिसमें क्विक कॉमर्स नेटवर्क शामिल है। वहीं, मीशो को 10 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष मौसमी रोजगार मिलने की उम्मीद है, जिसमें 6.5 लाख विक्रेता व 3.75 लाख लॉजिस्टिक्स से जुड़े होंगे। हालांकि, जेप्टो के सीओओ विकास शर्मा का कहना है कि वे अस्थायी के बजाय स्थायी और प्रशिक्षित वर्कफोर्स को प्राथमिकता देते हैं।

2030 तक कितना बड़ा हो जाएगा बाजार?

रिसर्च कंसल्टेंसी 'इन्फिसम' के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2024 के 125 अरब डॉलर से करीब तीन गुना बढ़कर 2030 तक 345 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस दौरान बाजार के 18.4% की सालाना कंपाउंड ग्रोथ (सीएजीआर) से बढ़ने की उम्मीद है। साल 2030 तक भारत के कुल रिटेल खर्च में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी 10-12% होगी और ऑनलाइन खरीदारों की संख्या 42 से 44 करोड़ तक पहुंच जाएगी।साफ है कि क्विक कॉमर्स और एआई आने वाले दिनों में भारतीय रिटेल मार्केट की पूरी तस्वीर बदलने के लिए तैयार हैं।

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