एफआईआई की बिकवाली की भरपाई कहां से हो रही?
हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के बावजूद घरेलू निवेशकों (डीआईआई) की दिलचस्पी बाजार में लगातार बनी हुई है। वे ना केवल अपनी पूर्व की खरीदारी को बनाए रखे हुए हैं, बल्कि लगातार नई खरीदारी भी कर रहे हैं। पिछले 21 कारोबारी सत्रों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 60,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। अप्रैल महीने के अंत तक म्यूचुअल फंड्स के पास करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की बड़ी नकदी मौजूद थी, जिस कारण वे विदेशी निवेशकों की ओर से की जा रही बिकवाली के कारण पैदा हुए दबाव को काफी हद तक कम करने में सफल रहे हैं।
उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में निवेशकों के भरोसे का क्या है कारण?
मोजोपीएमएस के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर सुनील दमानिया के अनुसार भारतीय इक्विटी बाजार लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहा है। 5 ट्रिलियन डॉलर के करीब बाजार पूंजीकरण तक पहुंचने से भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे देशों के एक विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है। इस उपलब्धि का श्रेय खुदरा निवेशकों को दिया जा सकता है, जिन्होंने हाल के वर्षों में बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद दृढ़ता से खरीदारी की है। साथ ही, सरकार के त्वरित सुधारों और भारतीय निगमों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने निरंतर निवेशकों की आय वृद्धि में योगदान दिया है। जिससे निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है और बाजार के प्रति उनका आकर्षण भी बढ़ा है। मौजूदा रैली आय वृद्धि और तरलता के संयोजन से प्रेरित है, जो अगले पांच वर्षों के भीतर भारत के बाजार पूंजीकरण को 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा सकती है। हालांकि, 5 ट्रिलियन डॉलर से 10 ट्रिलियन डॉलर के बीच की यात्रा में चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है और यह बहुत आसान यात्रा नहीं होगी।
विदेशी संस्थापक निवेशक क्यों कर रहे बिकवाली?
लेकिन, यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिर विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली क्यों कर रहे हैं? शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार विदेशी निवेशक देश में जारी चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम नहीं लेना चाहते, ऐसे में जबकि बाजार सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब हो। निफ्टी किसी भी दिन नए सर्वकालिक उच्च स्तर की ओर बढ़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन पहले ही पांच लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है।
2004 जैसी स्थिति बनने की आशंका से क्यों डर रहे विदेशी निवेशक?
बाजार के जानकारों के मुताबिक विदेशी निवेशक 2004 के लोकसभा चुनावों की तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते। उस समय अनुमानों के विपरीत कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन ने जीत दर्ज की थी। अचानक आए इस बदलाव के कारण शेयर बाजार में एक ही दिन में 15% की गिरावट देखने को मिली थी। विदेशी निवेशक ऐसी की अनिश्चितता से बचना चाहते हैं और इसलिए वे फिलहाल मुनाफावसूली कर रहे हैं। जानकार मानते हैं कि भारतीय बाजार में हालिया नरमी का फायदा चीन को मिल रहा है। हॉन्गकॉन्ग के हेंगसेंग इंडेक्स में पिछले एक महीने के दौरान 16% का उछाल आया है। उनके अनुसार बाजार में एफआईआई की बिकवाली का एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिकी बॉन्ड्स यील्ड में आई मजबूती भी है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिटेल रिर्सच प्रमुख दीपक जसानी ने बताया कि भारतीय बाजारों में एफपीआई की बिकवाली मुख्य रूप से उभरते हुए बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार की तुलना में महंगे मूल्यांकन की वजह से हो रही है। चीन को इस घटना या कहें अवसर का फायदा मिल रहा है। इसके अलावा चौथी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों में नरमी होने और देश में आम चुनाव के नतीजे से पहले अनिश्चितता के कारण भी कुछ एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली जारी है।
सीएनआई रिसर्च के सीएमडी किशोर पी ओस्तवाल का कहते हैं कि हमें एफपीआई की बिक्री से कोई चिंता नहीं है। एफपीआई की बिकवाली कुछ हद तक राजनीतिक अनिश्चितता के डर के कारण हो सकती है। हमें लगता है कि वे 4 जून के बाद खरीदारी के लिए वापस आएंगे। वैसे भी भारतीय बाजार किसी भी एफपीआई की बिकवाली को सोखने के लिए तैयार है। साल 2021 में एफपीआई ने 35 अरब डॉलर की बिकवाली की थी जिसे भारतीय निवेशक आसानी से पचा गए थे।
*सभी आकड़े अनुमानित।