पिछले एक साल में इक्विटी और डेट निवेशकों को फायदा देने के मामले में कमजोर साबित हुए हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स जहां करीब-करीब उसी स्तर पर रहा, दूसरी ओर डेट ने भी कोई बहुत अच्छा फायदा नहीं दिया है। हालांकि, इसने इक्विटी की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
ऐसे में आरबीआई के लगातार रेपो दर बढ़ाने के फैसले का असर यह हुआ कि एफडी रिटर्न देने में इक्विटी और डेट से आगे निकल गया है। साथ ही हाल में सरकार ने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीएफ) और छोटी बचत योजनाओं पर भी ब्याज बढ़ाया है। ऐसे में बिना जोखिम के लंबे समय में निवेश करने वाले रूढ़िवादी निवेशक इन पर दांव लगा सकते हैं।
आरबीआई के फैसले पर बाजार की नजर
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के वरिष्ठ टेक्निकल विश्लेषक प्रवेश गौर कहते हैं कि बाजार का अब पूरा मूड इस सप्ताह पेश होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के फैसले पर टिका है। हालांकि, आरबीआई दरों में 0.25 फीसदी की बढ़त कर सकता है।
शुक्रवार को जिस तरह बाजार में तेजी देखी गई, उससे अगर आरबीआई दरों को संभाल लेता है तो आगे बाजार तेजी में रह सकता है। वैश्विक बाजार इस समय बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा ब्याज
एफडी पर अभी 8-8.50% तक ब्याज मिल रहा है। पिछले पखवाड़े से कुछ छोटे बैंकों ने वरिष्ठ नागरिकों को 9.5% तक ब्याज देने की शुरुआत की है। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस इक्विटास और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस जैसे बैंक यह ऑफर दे रहे हैं। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 1001 दिन के एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 9.5 फीसदी ब्याज देने की घोषणा की है।
छोटी योजनाएं ज्यादा पसंदीदा, पर लॉक-इन अवधि चिंता
हाल में सरकार ने पीएफ और छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर बढ़ा दिया है। पीएफ पर दर भले ही मामूली बढ़ी हो, लेकिन छोटी बचत योजनाओं पर 0.70 फीसदी की वृद्धि अब उन लोगों के लिए एक मजबूत सहारा बन गई है, जो इसमें विश्वास करते हैं। आरबीआई ने ब्याज दरों को ऊपर रखा है और सरकारी बॉन्ड की दर भी लगातार ऊपर हैं।
निकट समय में इन योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम है। ऐसे में यह लोगों का पसंदीदा निवेश साधन बना रहेगा। हालांकि, लंबे समय की लॉक-इन अवधि इन निवेशकों के लिए चिंता पैदा करती हैं।
सरकारी व निजी बैंक पीछे
फंडों की लगातार बढ़ रही लागत के कारण सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक इस मामले में पीछे हैं। दरअसल, इन बैंकों ने अपने फंड की लागत को कम करने के लिए एफडी पर दरें बहुत कम बढ़ाए हैं, जबकि कर्ज लगातार महंगा हो रहा है। ऐसे में इन बैंकों की तुलना में जमा को आकर्षित करने के लिए छोटे बैंक तेजी से ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं। छोटे और बड़े बैंकों के जमा पर मिल रहे ब्याज में करीब एक से दो फीसदी का अंतर है।
एक साल में इक्विटी फ्लैक्सी कैप फंडों का रिटर्न
यूटीआई -9.88%
फ्रैंकलिन 2.01%
कोटक 2.93%
एक्सिस -8.57%
निप्पॉन इंडिया -1.51%
एसबीआई -3.42%
सेंसेक्स -1.6%
एक साल में शॉर्ट टर्म डेट फंड का रिटर्न
एलआईसी शॉर्ट टर्म 2.78%
महिंद्रा मैनुलाइफ 3.53%
कोटक बॉन्ड 3.57%
इंडिया बुल्स शॉर्ट टर्म 3.22%
एचएसबीसी शॉर्ट ड्यूरेशन 3.41%
टॉरस शॉर्ट टर्म 3.84%
टाटा शॉर्ट टर्म 3.92%