हर दिन उम्मीद से भी अधिक तेजी से डिजिटल हो रही दुनिया में वित्तीय लेनदेन जितना आसान हुआ है, उतना ही साइबर ठगी का खतरा बढ़ा है। यह हालात केवल भारत जैसे देशों में नहीं है, पूरी दुनिया का यही हाल है। ग्लोबल वॉचडॉग फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने अपनी एक नई और अहम रिपोर्ट में दुनिया भर के देशों को कड़ी चेतावनी दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साइबर फ्रॉड अब केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन मनी लॉन्ड्रिंग यानी धनशोधन, टेरर फाइनेंसिंग यानी आतंकियों को धन मुहैया कराने और प्रोलिफरेशन फाइनेंसिंग यानी सामुहिक विनाश के हथियारों के लिए धन उपलब्ध कराने जैसे बेहद गंभीर अपराधों से जुड़ गया है।
डिजिटलाइजेशन का कैसे हो रहा दुरुपयोग
एफएटीएफ की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि डिजिटलाइजेशन, तकनीकी प्रगति और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की सीमाहीन प्रकृति ने अपराधियों के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं। जालसाज अब धोखाधड़ी करने के बाद अवैध धन को तेजी से एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे इस पैसे को ट्रैक करना और वापस लाना बेहद जटिल हो गया है। एफएटीएफ अध्यक्ष एलिसा डी एंडा मद्राजो ने कहा है, "जैसे-जैसे जालसाज अपनी ठगी के तरीके बदल रहे हैं और इसमें तेजी ला रहे हैं, हमें भी लोगों के पैसे और पीड़ितों को भारी नुकसान से बचाने के लिए उसी रफ्तार से काम करना होगा"। उन्होंने वैश्विक मानकों में मौजूद खामियों का फायदा उठाने वाले जालसाजों को रोकने के लिए एफएटीएफ टूलकिट के पूर्ण उपयोग पर भी जोर दिया है।
ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए दुनिया में क्या तैयारी?
साइबर फ्रॉड के बढ़ते पैमाने और इसकी जटिलता को देखते हुए, एफएटीएफ ने आने वाले वर्षों में इस खतरे से निपटने के लिए अपने संसाधनों को केंद्रित करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसी दिशा में, समन्वित वैश्विक कार्रवाई और ठगी के पैसे की रिकवरी की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए एफएटीएफ के प्रतिनिधि अगले महीने वियना में इंटरपोल और यूएनओडीसी के साथ मिलकर ग्लोबल फ्रॉड समिट में भाग लेंगे। इस बैठक से वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को लेकर कई अहम नीतियां सामने आने की उम्मीद है।