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किसानों का विरोध जारी, जानिए MSP पर कितनी धान खरीद रही सरकार

Sat, 12 Dec 2020 05:24 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय किसान - फोटो : PTI
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कृषि कानून के खिलाफ आज 17वें दिन भी किसानों का विरोध जारी है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर किसान संगठनों में नाराजगी है। मालूम हो कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा खरीफ विपणन सत्र में अब तक एमएसपी पर धान की खरीद पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22.5 फीसदी बढ़कर 368.7 लाख टन तक पहुंच गई है। यह खरीद 69,612 करोड़ रुपये में की गई। 

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इन राज्यों में सुचारू रूप से जारी है धान की खरीद 
अक्तूबर 2020 से शुरू हुए मौजूदा खरीफ विपणन सत्र 2020-21 में सरकार लगातार नयूनतम समर्थन मूलय पर किसानों से खरीफ फसलों की खरीदारी कर रही है। इसमें कहा गया है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिल नाडु, चंडीगढ़, जम्मू कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में 2020-21 खरीफ सत्र की सरकारी खरीद लगातार सुनियोजित ढंग से चल रही है। 

पिछले साल की 300.97 लाख टन धान की खरीद
वक्तव्य में कहा गया है कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्यों की अन्य एजेंसियों ने 10 दिसंबर 2020 तक 368.7 लाख टन धान की खरीद कर ली है, जबकि इसी अवधि तक पिछले साल 300.97 लाख टन धान की खरीद की गई थी। इसमें कहा गया कि मौजूदा खरीफ विपणन सत्र के तहत एमएसपी पर चल रही खरीदारी से 39.92 लाख किसानों को फायदा हुआ है। 
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पंजाब में 202.77 लाख टन की खरीदारी
यह खरीद कुल मिलाकर 69,611.81 करोड़ रुपये की हुई है। वक्तव्य के मुताबिक धान की कुल 368.70 लाख टन की खरीद में से अकेले पंजाब में 202.77 लाख टन की खरीद की गई है। इस प्रकार खरीफ की धान खरीद में करीब 55 फीसदी खरीदारी पंजाब से हुई है।

क्या है एमएसपी?
न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत सरकार किसानों द्वारा बेचे जाने वाले अनाज की पूरी मात्रा खरीदने के लिए तैयार रहती है। जब बाजार में कृषि उत्पादों का मूल्य गिर रहा होता है, तब सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पाद खरीदकर उनके हितों की रक्षा करती है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा फसल बोने से पहले ही कर दी जाती है।

विरोध के मुख्य कारण क्या हैं?
नए कृषि कानूनों को वापस लेने और फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों को सरकार के कानून पर आपत्ति है क्योंकि इस कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि मंडी के बाहर किसानों को न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। ऐसे में हो सकता है कि किसी फसल का ज्यादा उत्पादन होने पर व्यापारी किसानों को कम कीमत पर फसल बेचने पर मजबूर करें।

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