कृषि कानून के खिलाफ आज 10वें दिन भी किसानों का विरोध जारी है। इसी कड़ी में आज दिल्ली बॉर्डर पर जमे किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत होगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर किसान संगठनों में नाराजगी है। मालूम हो कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ विपणन सत्र में अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद 20 फीसदी बढ़कर लगभग 330 लाख टन हो गई है। यह खरीद 62,278.61 करोड़ रुपये में हुई है। एक सरकारी बयान में कहा गया कि चालू खरीफ विपणन सत्र 2020-21 में, सरकार ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जारी रखी है। खरीफ का विपणन सत्र अक्तूबर से शुरू होता है।
इन राज्यों में सुचारू रूप से जारी है धान की खरीद
खरीफ 2020-21 के लिए धान की खरीद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में सुचारू रूप से जारी है। भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकार की एजेंसियों ने पिछले साल की इसी अवधि में 275.98 लाख टन की खरीद के मुकाबले तीन दिसंबर तक 329.86 लाख टन धान खरीदा है।
पंजाब का 61.47 फीसदी योगदान
बयान में कहा गया है कि, 'लगभग 31.78 लाख किसानों को पहले ही 62,278.61 करोड़ रुपये के एमएसपी मूल्य के भुगतान के साथ चालू खरीफ विपान सत्र के खरीद कार्यों के जरिए लाभान्वित किया जा चुका है।' इसमें कहा गया है कि 329.86 लाख टन की कुल खरीद में से, पंजाब ने अकेले 202.77 लाख टन का योगदान दिया है, जो कि कुल खरीद का 61.47 फीसदी हिस्सा है।
क्या है एमएसपी?
न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत सरकार किसानों द्वारा बेचे जाने वाले अनाज की पूरी मात्रा खरीदने के लिए तैयार रहती है। जब बाजार में कृषि उत्पादों का मूल्य गिर रहा होता है, तब सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पाद खरीदकर उनके हितों की रक्षा करती है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा फसल बोने से पहले ही कर दी जाती है।
विरोध के मुख्य कारण क्या हैं?
नए कृषि कानूनों को वापस लेने और फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों को सरकार के कानून पर आपत्ति है क्योंकि इस कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि मंडी के बाहर किसानों को न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। ऐसे में हो सकता है कि किसी फसल का ज्यादा उत्पादन होने पर व्यापारी किसानों को कम कीमत पर फसल बेचने पर मजबूर करें।