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कश्मीर के किसानों को करोड़ों का नुकसान, क्या सरकार से मिलेगी मदद?

Mon, 02 Sep 2019 03:44 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म हुए करीब एक महीना हो चुका है। अब खबर आई है कि कश्मीर के मौजूदा सुरक्षा माहौल से करोड़ों रुपये के फल और ड्राई-फ्रूट का व्यापार प्रभावित हुआ है। 

कश्मीर में इतना होता है उत्पादन 

भारत का 91 फीसदी अखरोट का उत्पादन कश्मीर में होता है। देश के 70 फीसदी सेब का उत्पादन भी कश्मीर में ही होता है। इसके अतिरिक्त 90 फीसदी बादाम के साथ देश की 90 फीसदी चेरी और केसर भी कश्मीर से ही आती है। इनका एक साल का मूल्य करीब सात हजार करोड़ रुपये है। प्रति वर्ष कश्मीर की खेती में 23.535 मीट्रिक टन पैदावार होती है। 23.535 मीट्रिक टन में से 20.35 लाख मीट्रिक टन योगदान फलों का है। इसके अलावा सूखे फलों की हिस्सेदारी 2.80 लाख मीट्रिक टन है। साल 2016-17 में बागवानी क्षेत्र ने सेब के बगीचे और अन्य के तहत 7.71 करोड़ रुपये का रोजगार दिया था। घाटी में बागबानी उद्योग करीब 7,000 करोड़ रुपये का है। इसमें सबसे अधिक पैदावार सेब की है। 

किसानों को हो रही है दिक्कत

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, एक सेब किसान ने कहा कि संवाद का माध्यम न होना उनकी सबसे बड़ी समस्या है। लैंडलाइन कनेक्शन नहीं होने से राज्यों के होलसेल डीलरों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इतना ही नही, सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से कोई कश्मीर आने के लिए भी तैयार नहीं है। इसलिए हम अपने उत्पाद उचित दाम पर नहीं बेच पा रहे हैं। 

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एक अन्य सेब व्यापारी ने कहा कि, पिछले साल जहां उसने 1200-1300 सेब के डिब्बे बेचे थे। इस साल एक डिब्बे का दाम 450 से 500 रुपये गिरा है।

घाटी के व्यापारी शिकायत कर रहे हैं कि वहां सुरक्षा पाबंदियों और पत्थरबाजों के डर से 2000 के मुकाबले सिर्फ 200 ट्रक ही उपलब्ध हैं। जबकि सरकारी आकलन के अनुसार, 15 सितंबर 2019 से शुरू होने वाले पीक सीजन के दौरान रोजाना लगभग 1100-1200 ट्रकों की जरूरत होगी।

किसानों की मदद के लिए काम कर रहा है NAFED 

बीते दिनों जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मालिक ने कहा था कि नेशनल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) इस क्षेत्र में सेब उत्पादकों की मदद करने के प्लान पर काम कर रहा है। राज्य प्रशासन को NAFED से मद लेनी पड़ रही है। सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बाजार मूल्य से 10 रुपये अधिक होने की घोषणा हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि NAFED 5,500 करोड़ रुपये का सेब खरीद सकता है, जो कुल उत्पादन का 50 फीसदी से अधिक होगा। 

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