यात्री और दोपहिया वाहन श्रेणी में ग्रामीण क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से देश के खुदरा बाजारों में बीते वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 2.61 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बिक गईं। यह 2023-24 में बिके कुल 2,45,58,437 वाहनों की तुलना में 6 फीसदी अधिक है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने सोमवार को कहा, 2024-25 में यात्री वाहनों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि देखी गई। हालांकि, वाणिज्यिक वाहनों और ट्रैक्टर के पंजीकरण में गिरावट रही। संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री 2023-24 के 39,60,602 की तुलना में बीते वित्त वर्ष पांच फीसदी बढ़कर 41,53,432 इकाई पहुंच गई।
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दोपहिया वाहनों की बिक्री में 8 फीसदी का उछाल
दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री 2024-25 में सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़कर 1,88,77,812 इकाई पहुंच गई। तिपहिया वाहनों की बिक्री पांच फीसदी बढ़कर 12,20,981 इकाई हो गई। हालांकि, ट्रैक्टर की बिक्री एक फीसदी घटकर 8,92,410 इकाई रह गई। फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने कहा, 2024-25 वास्तव में खुदरा वाहन क्षेत्र के लिए लचीला रहा। मुख्य आकर्षण ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन रहा।
यूरोपीय संघ ने भारत से कार आयात पर की टैरिफ खत्म करने की मांग
उधर, यूरोपीय संघ ने भारत के साथ लंबित व्यापार समझौते के तहत कार आयात पर टैरिफ समाप्त करने की मांग की है। सूत्रों ने बताया कि मोदी सरकार वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए अपने वर्तमान प्रस्ताव को और अधिक सरल बनाने को तैयार है।
कुछ सप्ताह पहले अमेरिका ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों सहित कारों पर आयात शुल्क समाप्त करने की मांग की थी, जिससे घरेलू कार निर्माताओं पर दबाव बढ़ गया है। वाहन उद्योग और सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत टैरिफ को 100 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के लिए तैयार है। ऐसा तब है जब भारत के ऑटो उद्योग ने सीमित संख्या में पेट्रोल कारों पर टैरिफ को तत्काल 100 फीसदी से घटाकर 70 फीसदी करने और फिर चरणबद्ध तरीके से 30 फीसदी तक कटौती करने का प्रस्ताव दिया है। ईवी के मामले में, कार निर्माता चाहते हैं कि 2029 तक टैरिफ में कोई कटौती न की जाए और उसके बाद सीमित आयात पर चरणबद्ध तरीके से 30 फीसदी तक कटौती की जाए।
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