फेसबुक ने पिछले महीने ही लिब्रा (Libra) नाम से अपनी क्रिप्टोकरंसी लॉन्च की है, लेकिन भारतीय बाजार के लिए लिब्रा की राह मुश्किल होती नजर आ रही है। अब लिब्रा करंसी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वैश्विक नियामकों के निशाने पर है। ट्रंप ने इस करंसी को आधारहीन और अविश्वसनीय बताया है। इसके साथ ही व्यापक क्रिप्टोकरंसी समुदाय ने भी इस पर संशय जताया है।
ऐसा माना जा रहा है कि लिब्रा वैश्विक तौर पर हावी आभासी मुद्रा बिटक्वाइन को चुनौती देने वाला है। इसके 2020 की पहली छमाही में इसके आरंभ होने की संभावना है।
स्मार्टफोन पर लिब्रा का इस्तेमाल करने के लिए यूजर को आभासी वॉलेट पर जाना होगा, जिसका नाम कैलिब्रा दिया जाएगा। फेसबुक ने अपनी क्रिप्टोकरंसी लिब्रा के लिए 27 कंपनियों से साझेदारी की है जिनमें पेपल, वीजा ऊबर जैसी कंपनियों के नाम हैं।
ट्रंप ने आभासी मुद्राओं पर हमला करते हुए कथित अस्पष्ट प्रकृति के लिए उनकी आलोचना की और दलील दी कि लिब्रा का कोई आधार नहीं है और ना ही कोई विश्वसनीयता है।
पिछले साल अप्रैल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भारत में सभी प्रकार की क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं पिछले महीने ही क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2019 (Banning of Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2019) के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव दिया गया है कि देश में क्रिप्टोकरंसी की खरीद-बिक्री करने वालों को 10 साल की जेल की सजा मिलेगी। ड्राफ्ट के मुताबिक इसकी जद में क्रिप्टोकरंसी तैयार करने वाले, बेचने वाले, रखने वाले और किसी भी तरह से डील करने वाले ऐसे सभी लोग आएंगे। इन सभी मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 साल की जेल होगी।