इनके आयात में बढ़ोतरी
| उत्पाद |
वृद्धि |
| कॉटन |
351.67% |
| खाद, क्रूड |
161.37% |
| न्यूजप्रिंट |
113.44% |
| आयरन-स्टील |
37.85% |
| कच्चा तेल |
29.10% |
| चमड़ा |
29.08% |
| यातायात उपकरण |
27.19% |
| लकड़ी |
22.21% |
निर्यातकों के संगठन फियो ने कहा, माल की कीमतों में वृद्धि, बढ़ती महंगाई, मंदी में प्रवेश करने वाली अर्थव्यवस्था, मुद्राओं में उच्च अस्थिरता व भू-राजनीतिक संकट के कारण मांग में कमी के बीच वस्तुओं के निर्यात में मंदी आई है।
वैश्विक हालातों ने बढ़ाई मुश्किल
वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर विपरीत परिस्थितियां दुनियाभर में मांग को प्रभावित कर रही हैं। इसका भारत के निर्यात पर भी प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक व्यापार (मर्चेंडाइज) में भारत की हिस्सेदारी 1.8% है, जबकि वैश्विक सेवाओं में यह 4 फीसदी है। इसे बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मुताबिक, वैश्विक व्यापार इस साल 3.5 फीसदी बढ़ सकता है, जबकि 2023 में इसकी वृद्धि दर घटकर महज एक फीसदी रह जाएगी।