देश से इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में अमेरिका अब भी शीर्ष पर बना है। 2022-23 में अमेरिका के निर्यात में 6.8 फीसदी की वृद्धि हुई, जो 18.67 अरब डॉलर रहा। इस दौरान चीन को निर्यात 52.4 फीसदी घटकर केवल 2.63 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले 5.53 अरब डॉलर था।
भारत से इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में जिन देशों में वृद्धि आई है उनमें ब्रिटेन, जर्मनी, सिंगापुर, सऊदी अरब, मैक्सिको और इंडोनेशिया हैं। जबकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), तुर्किये और थाईलैंड के निर्यात में गिरावट आई है। देश से इंजीनियरिंग का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 में 112.16 अरब डॉलर रहा था।
2022-23 में यह 4.57 फीसदी घटकर 107.40 अरब डॉलर पर आ गया। हालांकि, रुपये के रूप में यह सालाना आधार पर 2.77 फीसदी की दर से बढ़ा है क्योंकि डॉलर की तुलना में रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में देश के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में इंजीनियरिंग निर्यात 23.92 फीसदी था, जो 2021-22 में 26.58 फीसदी रहा था। कुल 34 इंजीनियरिंग पैनल में से 22 के निर्यात में तेजी रही जबकि 12 के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। इंजीनियरिंग निर्यात लगातार पांचवें महीना गिरा है।
500 अरब डॉलर पार पहुंच सकता है मर्चेंडाइज निर्यात
देश का मर्चेंडाइज निर्यात इस वित्त वर्ष में 500 अरब डॉलर के पार पहुंच सकता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, विश्व के प्रमुख बाजारों में घरेलू सामानों की बेहतर मांग से अमेरिका सहित अन्य देशों में निर्यात बढ़ेगा।
पीएलआई योजना पर सरकार ने खर्च किए 1,181 करोड़
सरकार उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) पर एक अप्रैल, 2021 से लेकर इस साल 31 जनवरी तक कुल 1,181 करोड़ रुपये खर्च किया है। दूरसंचार विभाग ने बताया कि इस योजना के तहत इस साल फरवरी में कुल 13,541.27 करोड़ रुपये की बिक्री हुई। निर्यात 5,746.90 करोड़ रुपये का रहा।
दूरसंचार विभाग ने बताया कि फरवरी में 3,418 वाई फाई हॉटस्पॉट लगाए गए जबकि कुल ह़ॉटस्पॉट की संख्या 1.47 लाख के पार पहुंच गई। विभाग ने कहा, भारतीय टेलीफोन उद्योग (सरकारी) का कारोबार 68.44 करोड़ रुपये रहा।