टैरिफ युद्ध के बीच भारत और दुबई के बीच कारोबारी और रणनीतिक अवसरों को बढ़ाने के लिए 200 अधिकारियों और निवेशकों ने मुंबई में दुबई चैंबर की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान दुबई-भारत व्यापार मंच ने रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने, सीमा पार व्यापार बढ़ाने और स्थानीय व वैश्विक स्तर पर निवेश के नए अवसरों का निर्माण करने पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन 18 फरवरी 2022 को यूएई और भारत के बीच कॉम्प्रेहेंसिव इकोनॉमी पार्टनशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर हस्ताक्षर करने के तीन साल बाद आयोजित हुआ।
दुबई चैंबर के उपाध्यक्ष अहमद बिन बयात ने कहा कि भारत की दुबई में भारतीय कारोबार में 90 प्रतिशत लघु और मध्यम उद्योग हैं, जिसमें फेमली कारोबार अधिक है। कारोबारियों को सुरक्षित कारोबारी माहोल, इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ बेहतरीन लॉजिस्टक सुविधा दुबई में प्रदान की जा रही है। भारतीय कारोबारियों के लिए 30 कारोबारी फ्री जोन है, जहां कारोबार करने के लिए सभी सुविधाएं हैं। दुबई के लिए भारत व्यापारिक भागीदार के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
उन्होंने कहा, "हमारे बाजारों के बीच गैर तेल व्यापार मूल्य 2024 के पहले नौ महीनों के दौरान 142 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जिसने साल दर साल 19 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है। दुबई में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में भी भारत 21.5 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर और दूसरे स्थान पर अमेरिका 13.17 प्रतिशत निवेश के साथ है।" उन्होंने कहा कि भारत में दुबई के कारोबारियों की ओर से निवेश किया जा रहा है। इस निवेश के लिए लॉजिस्टिक्स, रिन्युएबल एनर्जी और इन्फ्रा मुख्य क्षेत्र हैं। यहां कुछ परेशानियां हैं, जैसे अलग-अलग राज्यों में कई तरह के अलग-अलग कानून है। इसे लेकर हम राज्यों की सरकार के साथ बातचीत में हैं।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के उपाध्यक्ष आर मुकुंदन ने वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच दुबई भारत संबंधों को और मजबूत करने की बात करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए दुबई महत्वपूर्ण स्थान होगा। दुबई का इन्फ्रास्टक्चर, दूसरे देशों से कनेक्टिवटी और स्टार्टअप्स के लिए लॉन्चपैड रूप अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को दुबई से बेहतरीन इंफ्रास्टक्चर, लॉजिस्टिक सुविधाएं, रिन्युएबल एनर्जी सहित टेक्नोलॉजी सीखने की जरूरत है। वहीं दुबई भारत से डिजिटल तकनीक के साथ स्टार्टअप को बढ़ावा देने के तरीकों पर ध्यान केंद्रीत कर रहा है।
दुबई ही नहीं पूरे विश्व ने भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर ध्यान केंद्रीत किया है। वित्त वर्ष 2026 तक भारत एक ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। दुबई ने इसको पहचाना है और भारत से डिजिटल तकनीकों पर काम कर रहा है। 2022 से भारत-यूएई स्टार्टअप कॉरिडोर दोनों देशों में स्टार्टप को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। जिसका लक्ष्य पांच सालों में 50 स्टार्टअप की मदद करना है और इस साल के अंत तक कम से कम 10 यूनिकॉर्न में बदलना है, जो कि दुबई की अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का व्यापक योजना का हिस्सा है।
इस कार्यक्रम में आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान प्रबंध समिति के सदस्य अनंत सिघानियां बताया कि भारत से जो भी छोटे और मध्यम दर्ज के उद्योग दुबई में अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं, वे आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़कर सभी तरह की जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा हम व्यापारियों के साथ जुड़े हुए हैं और उनको कारोबार बढ़ाने में पूरी सहायता कर रहे हैं।