सरकारी आंकड़ों में महंगाई की रफ्तार भले ही अभी नियंत्रण में दिख रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर यह केवल नंबरों का भ्रम है। चालू वित्त वर्ष में महंगाई का एक और तीखा दौर शुरू होने वाला है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 फीसदी पर पहुंच सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष में महज 2.0 फीसदी थी। जुलाई के दौरान खुदरा महंगाई 4.38 फीसदी से मामूली बढ़कर 4.45 फीसदी रही। इस आंकड़े को पिछले साल के ऊंचे बेस (खाद्य तेल और सब्जियों के दाम) ने कुछ हद तक ढक रखा था, लेकिन यह सुरक्षा कवच अब तेजी से खत्म हो रहा है।
पेट्रोलियम कंपनियों का नुकसान फिर बढ़ा : पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब पांच रुपये और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। विश्लेषकों के अनुसार, क्रूड की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का डॉलर में होने वाला आयात खर्च बढ़ेगा, जिससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ेगा।
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अगर खुदरा स्तर पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बदलाव नहीं किया जाता है, तो पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को इनकी बिक्री पर और ज्यादा नुकसान उठाना होगा, जिससे इनके मार्जिन प्रभावित होगा और शेयरों पर दवाब दिखेगा। फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तीन महीने से अधिक समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
महंगाई बढ़ने के कारण
- थोक ट्रांसपोर्ट लागत 46% उछली : अप्रैल-जून तिमाही में थोक कीमतों में परिवहन से जुड़ी महंगाई करीब 46% बढ़ी है। उत्पादकों और आपूतिकर्ताओं ने अब तक इस बढ़ी लागत का बड़ा हिस्सा खुद झेला है, पर आने वाले महीनों में इसे सीधे खुदरा कीमतों पर डाला जाएगा। जब माल ढुलाई का खर्च अंतिम उत्पाद कीमत में जुड़ेगा, तो गैर-खाद्य उत्पादों के दाम तेज होंगे।
- कच्चा तेल 100 डॉलर के पार और रसोई गैस की मार : पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ब्रेंट कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। भारत 88 फीसदी से अधिक तेल आयात करता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 89 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। अगर क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिकता है, तो पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें घरेलू महंगाई को दोबारा भड़काएंगी।
- खाद्य टोकरी में उबाल : सब्जियों, खासकर टमाटर और आलू में आई अस्थायी नरमी के बावजूद खाद्य महंगाई जुलाई में 5.3 फीसदी से बढ़कर 5.5 फीसदी पर पहुंच गई। अनाज (1.7 फीसदी) और दालों (2.7 फीसदी) में दबाव बढ़ रहा है। प्याज की महंगाई 22.6 फीसदी पहुंच चुकी है।
तेल कंपनियों को पेट्रोल पर पांच रुपये और डीजल पर 23 रुपये का नुकसान
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद तेल विपणन कंपनियों का घाटा बढ़ गया है। तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, प्रति एलपीजी सिलिंडर पर 200 रुपये का नुकसान हो रहा है। हालांकि, घरेलू बाजार में इन उत्पादों की कीमत में कोई बदलाव नहीं आया है।