तेल की मांग बढ़ेगी तो क्या प्रदूषण भी फैलता रहेगा?
बिल्कुल नहीं। जब बीएस-6 मानक के वाहन और ईंधन सब जगह अनिवार्य होंगे तो ऐसा नहीं होगा। इस मानक के डीजल इंजन को चाहे कार्य क्षमता के लिहाज से देखें या प्रदूषण मानक के हिसाब से, यह पेट्रोल से चलने वाले बीएस-6 इंजन के बराबर है। लिहाजा इनसे प्रदूषण शून्य रहेगा।
उज्ज्वला योजना से रसोई गैस घर-घर पहुंच गई है और बिजली कनेक्शन से भी लगभग सभी घर जुड़ गए हैं। ऐसे में मिट्टी तेल के उत्पादन की क्या रणनीति है?
जब मिट्टी तेल की मांग ही नहीं रहेगी तो इसका हम उत्पादन क्यों करेंगे। इसे बंद कर हम हवाई जहाज के ईंधन का उत्पादन बढ़ाएंगे। उड़ान योजना के बाद देश के कई छोटे शहरों तक हवाई सेवाएं शुरू की गई हैं जिससे एटीएफ की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मिट्टी तेल की जगह हम पेट्रोकेमिकल्स बनाएंगे।
सड़क परिवहन मंत्रालय से लेकर नीति आयोग तक, सबका जोर ई-वाहन पर है। इससे पेट्रोल-डीजल की मांग में कमी तो नहीं आएगी?
मेरा आकलन है कि आने वाले 15-20 साल तक पेट्रोल या डीजल की मांग में कोई कमी नहीं आएगी, बल्कि और बढ़ेगी। अभी भारत में हर वर्ष पेट्रोल की मांग में 9-10 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। डीजल की मांग भी बढ़ रही है। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों में 80 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की है। जब पेट्रोल की बिक्री का आंकड़ा देखेंगे तो पाएंगे कि हम 65 फीसदी से ज्यादा पेट्रोल दोपहिया वाहनों को बेचते हैं। इस समय दोपहिया वाहनों की ज्यादा बिक्री ग्रामीण इलाकों या छोटे शहरों में हो रही है। एक बार वाहन खरीदने वाले 15-20 साल तो चलाएंगे ही। यही हाल डीजल की खपत में भी है।