केंद्रीय बजट 2026 में डेरिवेटिव लेनदेन पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद, बाजार में आगे सख्ती की अटकलें तेज हो गई थीं। इन अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया कि नियामक फिलहाल डेरिवेटिव बाजार में किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप पर विचार नहीं कर रहा है।
सेबी द्वारा आयोजित 'पैन-इंडिया आउटरीच प्रोग्राम फॉर कॉरपोरेट बॉन्ड्स' के उद्घाटन सत्र में पांडे ने भारत के बॉन्ड बाजार की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल बैंक ऋण पर्याप्त नहीं है, पूंजी बाजारों को इस वृद्धि का नेतृत्व करना होगा।
उन्होंने मजबूत बैंकिंग व्यवस्था के साथ-साथ स्वच्छ, तरल और भरोसेमंद पूंजी बाजार की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि बुनियादी ढांचे, हरित परिवर्तन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराया जा सके।
पांडे ने निवेशकों में जागरूकता की कमी को भी बड़ी चुनौती बताया। सेबी के निवेशक सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट बॉन्ड को निवेश उत्पाद के रूप में केवल 10% लोगों की जानकारी है, जो जमा, बीमा, लघु बचत योजनाओं और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी (15%) से भी कम है।
उन्होंने विकसित कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के लाभ गिनाते हुए कहा कि यह बैंक ऋण का विकल्प प्रदान करता है, जोखिमों का विविधीकरण करता है और कंपनियों के लिए पूंजी की लागत कम करने में मदद कर सकता है।
म्यूनिसिपल बॉन्ड्स को लेकर सेबी प्रमुख ने कहा कि इस क्षेत्र में भी जागरूकता की कमी है। फिलहाल नगरपालिकाओं द्वारा जारी बॉन्ड्स की संख्या बेहद सीमित है अब तक केवल 12 निर्गम हुए हैं। हालांकि, बजट घोषणाओं के मुताबिक सरकार नगरपालिकाओं को ऐसे बॉन्ड जारी करने में समर्थन देगी। पांडे ने कहा कि भले ही यह बाजार अभी शुरुआती और लगभग नगण्य स्तर पर है, लेकिन इसमें भविष्य में बड़ी संभावनाएं हैं और इसके लिए नियामक ढांचा तेजी से विकसित हो रहा है।