ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए पीएफ खातों पर मिलने वाली ब्याज दरों की सिफारिश कर दी है। सीबीटी की बैठक में इसे 8.5 फीसदी से घटाकर 8.1 फीसदी कर दिया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईपीएफओ क्या है और कैसे काम करता है। तो हम आपको यहां दे रहे हैं इन सवालों के जवाब।
क्या है कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाजेशन) भारत की एक राज्य प्रोत्साहित अनिवार्य अंशदायी पेंशन और बीमा योजना प्रदान करने वाला शासकीय संगठन है। सदस्यों और वित्तीय लेन-देन की मात्रा के हिसाब से देखें तो यह विश्व का सबसे बड़ा सगठन है। इसकी पावरफुल बॉडी सीबीटी होती है, जो कि ब्याज दरों पर फैसला लेती है।
सीबीटी को इस तरह से समझें
ब्याज दरों को तय करने में सीबीटी की भूमिका सबसे अहम होती है। केंद्रीय श्रम मंत्री इसके प्रमुख होते हैं। केंद्र सरकार का लेबर सेक्रेटरी इसका वाइस-चेयरमैन होता है। इसमें केंद्र सरकार के पांच और राज्य सरकारों के 15 प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। इसके अलावा ईपीएफओ की इस पावरफुल बॉडी में कर्मचारियों के 10 और नियोक्ताओं के 10-10 प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
ईपीएफओ यहां करता निवेश
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफओ अपना 85 फीसदी पैसा डेट में निवेश करता है, जबकि बाकी का 15 फीसदी पैसा शेयरों में डालता है। डेट के तहत इसे कम से कम 45 फीसदी ब्याज प्राप्त होता है। वहीं अधिकतम ब्याज की बात करें तो यह 65 फीसदी हो जाता है। ईपीएफओ को उसका पैसा सरकारी सिक्योरिटीज और इससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट में निवेश करने की भी इजाजत है। शेयरों में निवेश की बात करें तो ईपीएफ को म्यूचुअल फंड्स और सेबी रेगुलेटेड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में भी निवेश की भी इजाजत है।
ये है पैसे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया
जैसा कि बताया गया है कि ईपीएफओ का सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) पीएफ पर इंट्रेस्ट रेट की सिफारिश करता है। इसके बाद श्रम मंत्रालय इस पर वित्त मंत्री की मंजूरी लेता है। इसके बाद ईपीएफओ इसकी अधिसूचना जारी कर देता है। फिर अगले दो से तीन हफ्ते में यह पैसा सबक्राइबर के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है।