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Vehicles: ई-वाहनों की बिक्री 55% बढ़ी; ई-दोपहिया खरीदार भी बढ़े; स्क्रैप को नहीं मिल रही अपेक्षित प्रतिक्रया

Wed, 07 Aug 2024 06:01 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

फाडा के आंकड़ों के मुताबिक देश में ई-वाहनों की बिक्री 55 फीसदी बढ़ी है। ई-दोपहिया के खरीदार भी तेजी से बढ़े हैं। फाडा के आंकड़ों के मुताबिक दो पहिया के मामले में 96 फीसदी का उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, वाहनों से जुड़े एक अन्य क्षेत्र- स्क्रैप को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।
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इलेक्ट्रिक कार (फाइल) - फोटो : Freepik
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विस्तार
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वाहनों से जुड़ी रोचक जानकारी सामने आई है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री जुलाई, 2024 में सालाना आधार पर 55.2 फीसदी बढ़कर 1,79,038 इकाई पहुंच गई। ई-दोपहिया वाहनों की बिक्री में 96 फीसदी की अच्छी वृद्धि से कुल बिक्री बढ़ी है। एक साल पहले की समान अवधि में कुल 1,16,211 ई-वाहन बिके थे। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, ई-दोपहिया वाहनों की बिक्री पिछले महीने 95.94 फीसदी बढ़कर 1,07,016 इकाई पहुंच गई। जुलाई, 2023 में देशभर में कुल 54,616 ई-दोपहिया वाहन बिके थे। 
  • गिरावट के बावजूद 2.4 फीसदी बनी हुई है ई-यात्री वाहनों की बाजार हिस्सेदारी
1,79,038 इलेक्ट्रिक वाहन बिके देशभर में जुलाई में
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ई-तिपहिया वाहनों की बिक्री 18.18 फीसदी बढ़कर 63,667 इकाई पहुंच गई। वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री दोगुना से अधिक होकर 816 इकाई पहुंच गई। हालांकि, ई-यात्री वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 2.92 फीसदी घटकर 7,541 इकाई रही।

15 साल पुराने वाहनों के स्क्रैप को नहीं मिल रही है प्रतिक्रिया
15 साल पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने की योजना को अच्छा रिस्पांस नहीं मिल रहा है। हर महीने 4,000-5,000 गाड़ियां ही स्क्रैप के लिए आ रही हैं। ऐसे में 9 लाख गाड़ियों को स्क्रैप करने का सरकार का लक्ष्य लंबा खिंच सकता है। पिछले साल केंद्र सरकार ने 9 लाख पुराने वाहनों को स्क्रैप में भेजने के लिए मंजूरी दी थी। उद्योग के मुताबिक, पंजीकृत व्हीकल स्क्रैप फैसिलिटी (आरवीएसएफ) में हर साल 40,000-50,000 वाहन आ रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि नीतियां पूरे देश में एक समान नहीं है। रोसमारटा टेक्नोलॉजी के प्रेसिडेंट कार्तिक नागपाल कहते हैं कि दिल्ली में 10-15 साल के वाहनों को स्क्रैप करना है। वहीं, राजस्थान या किसी और राज्य में यह अवधि 15 साल से ज्यादा है। ऐसे में दिल्ली के वाहन उन राज्यों में जाकर बेच दिए जाते हैं। इसे देखते हुए असंगठित स्क्रैप सुविधाओं को बंद करना चाहिए।
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