आठ कोर सेक्टर में अक्तूबर महीने में 5.8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। बिजली की खपत में कमी से यह गिरावट आई है। सितंबर माह में कोर सेक्टर 5.2 फीसदी गिर गया था। जीडीपी के दूसरी तिमाही के नतीजों के आने से पहले यह गिरावट सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कोर सेक्टर इंडेक्स के अनुसार औद्योगिक उत्पादन घटने से बिजली की मांग में बड़ी कमी देखने को मिली है। पिछले महीने यह खपत सितंबर के -3.7 फीसदी के मुकाबले इस बार -12.4 फीसदी हो गई। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे तगड़ा झटका कोयला क्षेत्र को लगा है जिसमें उत्पादन में 17.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। वहीं, कच्चे तेल के उत्पादन में 5.1 फीसदी और प्राकृतिक गैस में 5.7 फीसदी की कमी आई। वहीं सीमेंट के उत्पादन में 7.7 फीसदी, इस्पात में 1.6 फीसदी और विद्युत में 12.4 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
कोर सेक्टर में मुख्यतः आठ इंडस्ट्री शामिल होती हैं। यह हैं कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, स्टील, सीमेंट, बिजली, फर्टिलाइजर और रिफाइनरी उत्पाद। आईआईपी की गणना में इनका योगदान करीब 40.27 फीसदी रहता है। वैश्विक मोर्चे पर बिगड़ती स्थितियों के बीच निजी निवेश और उपभोक्ता मांग में सुस्ती से भारत की आर्थिक वृद्धि दर जून तिमाही में कम होकर पांच फीसदी पर आ गई है। यह पिछले छह साल की सबसे कम वृद्धि दर है।
अगस्त में, बिक्री में 15 महीनों में सबसे धीमी गति से विस्तार हुआ है। जिसका उत्पादन वृद्धि और रोजगार सृजन पर भी दबाव पड़ा है। इसके अलावा, कारखानों ने मई 2018 के बाद पहली बार खरीदारी में कमी की है।
वहीं दूसरी तरफ पहले छह माह में राजकोषीय घाटा बढ़कर के 92.4 फीसदी हो गया। वहीं इस साल के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.3 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी। इन छह माह में सरकार ने कुल 14.89 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, वहीं सरकार को कुल 8.37 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी।