अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सोमवार तक रद्द
जेट एयरवेज ने नकदी संकट के कारण सोमवार तक के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी है। इससे पहले कहा गया था कि जेट एयरवेज सिर्फ 16 विमानों का ही परिचालन कर रही है, जो भारतीय विमानन नियामकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने के लिए जरूरी 20 विमानों की संख्या से कम है।
नकदी संकट से पहले उसके बेड़े में 119 विमान थे। एयरलाइन पर इस समय एक अरब डॉलर से भी ज्यादा का कर्ज है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया था कि उसने किराये का भुगतान नहीं कर पाने के कारण 10 और विमानों का परिचालन बंद कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक एयरलाइन के संस्थापक नरेश गोयल, यूएई की एतिहाद एयरवेज, एयर कनाडा और अन्य निवेशकों ने एयरलाइन के लिए बोली सौंपी हैं।
50 से कम घरेलू उड़ानों का परिचालन
डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जेट अभी 50 से कम घरेलू उड़ानों का परिचालन कर रही है। उसके पास अभी उड़ान योग्य 16 विमान हैं। हालांकि, अधिकारी ने फिलहाल उड़ान भर रहे विमानों की संख्या के बारे में कुछ नहीं कहा।
इस बीच दूसरी विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने उड़ानों के निलंबन में कमी लाने के लिए ड्राई लीज पर 16 बोइंग 737-800 एनजी विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद उसके शेयर 8.5 फीसदी तक तेज हो गए।
5 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी गिरवी
नियामकीय सूचना के अनुसार, जेट एयरवेज की 5 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी एसबीआईकैप ट्रस्टी कंपनी के पास गिरवी रखी गई है। 8,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ में दबी एयरलाइन का पूरा नियंत्रण ऋणदाताओं के पास है। एयरलाइन की 5.19 फीसदी हिस्सेदारी या 58,95,704 शेयरों को 11 अप्रैल को एसबीआईकैप ट्रस्टी कंपनी के पास गिरवी रखा था। जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने पंजाब नेशनल बैंक से लोन लेने के लिए कंपनी में अपनी 26 फीसद हिस्सेदारी को गिरवी रखा है।
यात्रियों का 3,500 करोड़ से अधिक बकाया
उद्योग सूत्रों का कहना है कि जेट एयरवेज अब केवल नौ विमानों, दो बोइंग 737 और सात क्षेत्रीय जेट एटीआर का संचालन करेगा। बृहस्पतिवार दोपहर तक उसने महज 14 विमानों का संचालन किया। साथ ही पूर्व और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए अपनी उड़ानें बंद कर दीं। एक दिन के लिए अंतरराष्ट्रीय सेवाएं भी निलंबित कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, केवल उड़ानें रद्द होने से एयरलाइन पर यात्रियों का 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो गया है।
जेट का स्लॉट दूसरी कंपनी देने पर विचार
जेट एयरवेज की रद्द उड़ानों का असर कम करने के लिए सरकार दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसमें जेट एयरवेज के विमान नहीं उड़ने की वजह से खाली पड़े स्लॉट दूसरी एयरलाइंस को अस्थायी आधार पर देने का विकल्प भी शामिल है। ऐसा होने से फिलहाल खाली पड़े स्लॉट पर दूसरी कंपनी अपने विमानों का परिचालन कर सकती है।