प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की। इसके तहत कार्वी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन कमोंडूर पार्थसारथी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके साथ ही ग्रुप के चीफ फाइनेंस ऑफिसर, जी हरि कृष्ण की भी गिरफ्तारी की गई है।
चार दिन की हिरासत में भेजा गया
गिरफ्तारी के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की ईडी की हिरासत में भेज दिया गया। ये पूरा मामला कथित तौर पर ग्राहकों को हेराफेरी करने से जुड़ी 2,873 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा गया है। गौरतलब है कि पार्थसारथी अभी तक हैदराबाद की एक जेल में बंद थे। उन पर हैदराबाद की सेंट्रल क्राइम स्टेशन ने एफआईआर दर्ज की थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने पार्थसारथी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
बैंक कर्ज धोखाधड़ी में तेलंगाना की कंपनी की 43.25 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
बैंक कर्ज धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने तेलंगाना की कंपनी शीतल रिफाइनरीज लिमिटेड, उसके प्रवर्तकोें और प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार अग्रवाल की 43.25 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। ईडी के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि इसमें तेलंगाना स्थिति 15 भूमि संपत्ति शामिल हैं।
ईडी ने बेंगलुरु पुलिस की उस एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू की थी जिसमें आरोपी पर स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (अब एसबीआई) और पंजाब नेशनल बैंक को 87 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप था। ईडी ने जांच में पाया कि आरोपी प्रवर्तकों ने दोनों बैंकों से फर्जी वित्तीय विवरण और बिल दिखाकर कर्ज लिया था। उन्होंने माल खरीदने के लिए मुखौटा कंपनियों के नाम पर बैंकों से लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) जारी कराये। इस रकम को मुखौटा कंपनियों के खातों से शीतल रिफाइनरी के प्रवर्तकों के खातों में पहुंचाया गया। इसके बाद इन लोगों ने बैंकों को तय समय पर एलसी का भुगतान नहीं किया और बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ईडी के मुताबिक कंपनी पर बैंकों का कुल 146 करोड़ रुपये बकाया है।
हैदराबाद की कंपनी के फरार तीन प्रवर्तकों की संपत्ति जब्त
प्रवर्तन निदेशालय ने हैदराबाद की एक कंपनी 3के टैकभनोलॉजीज लिमिटेड के फरार तीन प्रवर्तकों की 3.19 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। ईडी ने बृहस्पतिवार को बताया कि कंपनी के प्रवर्तक करुसला वेंकट सुब्बा राव, तेजेश के कोडाली और काडियाला वेंकटेश्वर राव के खिलाफ यह कार्रवाई फेमा कानून के तहत की गई। इनकी तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 15 अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। इन तीन में से कोडाली अमेरिका में काम करता है और हाल ही में एफबीआई ने उसे गिरफ्तार किया है।