संसद में आज पेश किए गए 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मिली-जुली तस्वीर पेश की है। सरकार ने साफ किया है कि अगले वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, सर्वे में आगाह किया गया है कि कमजोर होता रुपया और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतें महंगाई को थोड़ी हवा दे सकती हैं।
सर्वे के मुताबिक, अगले साल महंगाई दर में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह आरबीआई के तय दायरे में ही रहेगी।
सर्वे और हालिया व्यापार समझौतों का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर भी दिखने वाला है। भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारतीय ऑटो सेक्टर सतर्क हो गया है।
महंगाई के काबू में रहने और ग्रोथ को सहारा देने के लिए आरबीआई अगले हफ्ते ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। यह इस साइकिल की आखिरी कटौती हो सकती है, जिससे होम लोन और कार लोन लेने वालों को थोड़ी और राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर आर्थिक सर्वे का संदेश साफ है- भारत की ग्रोथ स्टोरी मजबूत है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनी रहेगी। हालांकि, कमजोर रुपया और ग्लोबल मार्केट की उथल-पुथल के बीच सरकार को फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे।