कोरोना संक्रमण की मार में जहां एक ओर पूरी दुनिया की आर्थिक गतिविधियां थमी है वहीं भारत में स्टार्टअप कंपनियाें की रफ्तार बढ़ी है। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में दिसंबर तक 41,190 स्टार्टअप खुल चुके हैं। फरवरी 2020 में इनकी संख्या 29,017 थी।
मार्च में कोरोना संक्रमण के शुरू होने के साथ ही दुनिया के साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर दिखने लगा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और आत्मनिर्भर भारत के मंत्र ने ऐसा काम किया कि देश के लोगों ने इस संक्रमण काल की चुनौतियों को अवसर में बदल दिया, देश दुनिया का सबसे बड़ा तीसरे नंबर का स्टार्टअप इकोसिस्ट्म बन गया है।
इतना ही नहीं 2019 के मुकाबले इस साल 50 फीसदी स्टार्टअप को अधिक मान्यता दी गई है। अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि यह स्टार्टअप देश के विकास की दशा और दिशा में अहम भूमिका का निर्वाह करेंगे और हो सकता है अर्थव्यवस्था को इससे संजीवनी भी मिले। देश के लोगों के हौसलों को इससे समझा जा सकता है जब कोरोना संक्रमण शुरू हुआ तो देश में पीपीई किट, मास्क, फेस शील्ड से लेकर सैनिटाइजर तक की उपलब्धता को लेकर मारामारी थी।
इस संकट की स्थिति में संकल्प और राष्ट्रीय स्टार्टअप सलाहकार परिषद के गठन ने एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने में खासी मदद की। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा कई रियायतें दी गई, इसमें शुल्क अदा करने पर 2,785 पेटेंट आवेदनों को 80 फीसदी की छूट और 5,494 ट्रेडमार्क आवेदनों को 50 फीसदी की छूट दी गई।
इन क्षेत्रों के स्टार्टअप बढ़े
इस दौरान जिन क्षेत्रों में स्टार्टअप का रुझान बढ़ा उनमें ई-कॉमर्स, स्वास्थ्य और उससे जुड़े अवयवों से संबंधी, कृषि, शिक्षा, फिनटेक, डिजीटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, वित्त, आंतरिक सुरक्षा, अंतरिक्ष शामिल हैं। इनके अलावा पर्यटन और शहरी सेवाएं जिसमें घरों और कंपनियों में कोरोना संक्रमण से मुक्ति और रख-रखाव में सहायता, कंपनियों में श्रमिकों के मध्य कोरोना संक्रमण को लेकर जागरूकता और रख-रखाव, प्राचीन भारतीय जीवन पद्धतियां भी शामिल हैं।
स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए हुए ये बड़े बदलाव
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा इस बीच कई बड़े कदम उठाए गए। स्टार्टअप को विकसित करने की सुविधा के लिए 39 विनियामक सुधार किए गए। आयकर में छूट का प्रावधान किया गया, टर्नओवर मानदंड को 100 करोड़ रुपयों तक बढ़ाया गया। इसमें धारा 80 के तहत 3 साल आयकर छूट के और आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत पात्र नुकसान आगे बढ़ जाएंगे।