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Jaishankar: 'लैटिन अमेरिका संग व्यापार संबंधों को बढ़ाना चाहता है भारत’, बिज फोरम में बोले विदेश मंत्री जयशंकर

Fri, 28 Apr 2023 11:27 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागोटा

सार

कोलंबिया की राजधानी में भारत-कोलंबिया बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लैटिन अमेरिका के चार देशों की उनकी यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र के साथ भारत के सहयोग के स्तर को और अच्छा करना है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर। - फोटो : PTI
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विस्तार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत लैटिन अमेरिका के साथ अपना व्यापार बढ़ाना चाहता है जो 50 अरब डॉलर के करीब पहुंच रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि खनन, ऊर्जा, कृषि और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निवेश में अच्छी खासी ग्रोथ से इसे और बढ़ावा मिलेगा।

कोलंबिया की राजधानी में भारत-कोलंबिया बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लैटिन अमेरिका के चार देशों की उनकी यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र के साथ भारत के सहयोग के स्तर को और अच्छा करना है। उन्होंने कहा कि आज यहां आने का हमारा उद्देश्य लैटिन अमेरिका में भारत की बढ़ती उपस्थिति को उजागर करना है। हमारे बीच व्यापार सालाना 50 अरब डालर तक पहुंच रहा है। हमारी कंपनियां ऊर्जा, खनन से लेकर कृषि व ऑटो क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश कर रही हैं।

 

उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां लैटिन अमेरिका में परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही हैं, जिसमें बुनियादी ढांचा, बिजली पारेषण और खनन शामिल हैं। साथ ही शिपिंग और विमानन क्षेत्र में भी उत्पाद वितरित कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि हमारा व्यापार का संबंध है। हम स्वाभाविक रूप से इसका विस्तार करना चाहते हैं। हमारे सामने चुनौती यह है कि कब, कहां और कितना निवेश करना है। वहीं फार्मास्युटिकल उद्योग भी चुनौती से घिरा हुआ है। 

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महामारी ने दिखाया आईना

जयशंकर ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने लगभग 100 देशों को टीके और 150 देशों सहित विकसित देशों को दवाओं की आपूर्ति करके सही मायने में स्थापित किया कि यह दुनिया की फार्मेसी है। उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि कोविड-19 ने हम सभी को स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बनाया है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों के बारे में भी जागरूक किया है। लागत भी एक प्रासंगिक कारक है। यदि हम अधिक स्रोतों, क्षेत्रीय उत्पादन और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण को देख रहे हैं, तो मैं कोलम्बियाई दोस्तों  को सुझाव दूंगा कि भारतीय उद्योग आपका स्वाभाविक भागीदार है।

भारत और कोलंबिया के बीच जुड़ते संबंधों पर जयशंकर ने कहा कि भारत में एक पारंपरिक चिकित्सा और कल्याण अभ्यास भी है, जिसके मजबूत व्यावसायिक प्रभाव हो सकते हैं।

गौरतलब है, जयशंकर गुयाना, पनामा, कोलंबिया और डोमिनिकन गणराज्य की नौ दिवसीय यात्रा पर हैं। विदेश मंत्री के रूप में इन लैटिन अमेरिकी देशों और कैरेबियाई देशों की उनकी पहली यात्रा है।

भारत, डोमिनिकन गणराज्य के बीच व्यापार कारोबार लगभग एक बिलियन अमेरिकी डालर तक पहुंच गया है
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत और डोमिनिकन गणराज्य के बीच व्यापार का कारोबार लगभग एक बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें कहा गया है कि फार्मास्यूटिकल्स, सोना और कागज उत्पाद का समुद्री क्षेत्र में बहुत अधिक व्यापार किया जाता है। 

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डोमिनिकन गणराज्य में भारत-डोमिनिकन गणराज्य व्यापार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, जयशंकर ने कहा कि यह एक राजनीतिक यात्रा है, लेकिन यह एक व्यापार भी यात्रा है। 20 साल पहले हमारे राजनयिक संबंध स्थापित करने से पहले हमारे पास 12 मिलियन अमरिकी डॉलर का व्यापार था, यह आज लगभग एक बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। और हमारा बहुत सारा व्यापार फार्मास्यूटिकल्स में, समुद्री उत्पादों में, दोपहिया और तिपहिया वाहनों के साथ लोहा और इस्पात, सोने और कागज और कागज उत्पादों में है। 

आगे उन्होंने यह भी कहा कि ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स, हेटेरो, कैपलिन पॉइंट और फ्लैगशिप बायोटेक जैसी कुछ भारतीय कंपनियां पहले ही डोमिनिकन गणराज्य में कार्यालय स्थापित कर चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कुछ बड़े ऑटोमोबाइल डीलर हैं, और बजाज, हीरो और रॉयल एनफील्ड जैसे दोपहिया डीलरों के वास्तव में डोमिनिकन गणराज्य में स्थानीय डीलर हैं।

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