इससे पहले ई-वे बिल का ट्रायल पूरे देश में 15 जनवरी से लागू हुआ था। ई-वे बिल के तहत 50,000 रुपये से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा।
यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।
उल्लेखनीय है कि ई-वे बिल प्रणाली पहले से ही कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड और केरल में शुरू हो चुकी है। अब तक इन राज्यों में प्रतिदिन लगभग 1.4 लाख ई-वे बिल बनते हैं। शेष राज्य अगले पखवाड़े में इसमें शामिल होंगे।
सुबह से सर्वर था डाउन
केपीएमजी इंडिया के पार्टनर प्रियाजीत घोष ने कहा कि जीएसटी सर्वर गुरुवार सुबह से ही डाउन था। जिसके कारण कारोबारी अपना तैयार माल बाहर नहीं भेज रहे थे। अगर सिस्टम 24 घंटे काम नहीं करेगा, तो फिर लोगों को ज्यादा परेशानी होगी।