कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की थी। देश अब लॉकडाउन के दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। हालांकि, इस बंदी से कारोबार को तगड़ा झटका लगा है। बंदी के चलते प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस लौट गए हैं। वहीं, स्थानीय मजदूर घरों पर बैठ गए हैं। ऐसे में ड्राइवरों और श्रमिकों की वजह से सड़कों से ट्रकें लगभग गायब हो गई हैं।
देशभर में बंदी के कारण ट्रक आपरेटरों को ड्राइवरों और माल चढ़ाने उतारने के लिए मजदूरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने कहा कि देशभर में कुल 90 लाख ट्रकें हैं। इनमें से केवल पांच फीसदी ट्रक इस समय सड़कों पर हैं, जिससे माल की ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
एआईएमटीसी ने कहा कि गृह मंत्रालय की तरफ से अधिसूचना जारी कर बंद के दौरान गैर जरूरी वस्तुओं की आवाजाही की अनुमति दे दी गई है, लेकिन इसके बावजूद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसका नतीजा यह है कि बहुत से ट्रक ड्राइवर अपने घरों को वापस लौट गए हैं या फिर ऐसी जगहों पर रुके हैं जहां खाने और ठहरने की सुविधा उन्हें मिल रही है।
एआईएमटीसी की कोर समिति के चेयरमैन और पूर्व अध्यक्ष बाल मलकित सिंह ने कहा, ‘‘देशभर में 90 लाख कॉमर्शियल वाहन हैं। इनमें से केवल पांच फीसदी कॉमर्शियल वाहन ही परिचालन कर रहे हैं। इन वाहनों से ज्यादातर एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई हो रही है। वहीं, छोटी दूरी के लिए दूध के टैंकर भी चल रहे हैं।
मलकित सिंह ने आगे कहा कि अभी बाजारों में जो फल, सब्जियां आ रही हैं, वो किसान खुद अपने माध्यमों से ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 24 मार्च की बंदी की घोषणा से पहले ही आंशिक बंदी लागू कर दी गई थी। ऐसे में कई राज्यों ने अपनी सीमाओं को सील किया हुआ था। इसकी वजह से लाखों ट्रक फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बंदी की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में ट्रक ड्राइवर अपने घरों को लौट गए। राजमार्गों पर ढाबे या दुकानों के बंद होने की वजह से बड़ी संख्या में ट्रक ड्राइवर उन जगहों पर चले गए जहां उन्हें खाने और रहने की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, चढ़ाने-उतारने के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं, जिसकी वजह से ट्रकों का परिचालन प्रभावित हुआ है।