अमेरिकी तकनीकी श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक संस्था ने कोरोना वायरस महामारी के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी के बीच अपने हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस साल एच-1बी वीजा कार्यक्रम को बंद करने का आग्रह किया है।
अमेरिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा कार्यक्रम पर निर्भर हैं।
एक गैर लाभकारी संगठन यूएस टेक वर्कर्स ने ट्रंप को अपने पत्र में अस्थाई रूप से आए विदेशी कामगारों के लिए एच-2बी वीजा कार्यक्रमों को निलंबित करने का आग्रह किया। इस संदर्भ में संस्था ने कहा कि, "हमने एक पत्र लिखकर कहा है कि कोरोना वायरस से आर्थिक संकट के मद्देनजर इस साल एच-1बी और एच-2बी वीजा वीजा कार्यक्रम को निलंबित कर दिया जाए।"
इससे पहले विदेशी आईटी पेशेवरों ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया था कि कोरोना वायरस महामारी के कारण अमेरिका में बड़े पैमाने पर छंटनी की स्थिति में नौकरी जाने पर उन्हें 60 दिन के बजाए 180 दिनों तक अमेरिका में रुकने की इजाजत दी जाए। इन पेशेवरों में ज्यादातर भारतीय एच-1बी वीजाधारक हैं। मालूम हो कि एच-1बी एक गैर प्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को कुछ खास व्यवसायों में नियोजित करने की अनुमति देता है। भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच इसकी सबसे अधिक मांग है। मौजूदा नियमों के अनुसार, नौकरी छोड़ने के 60 दिनों के भीतर इन वीजाधारकों को अपने परिवार के साथ अमेरिका छोड़ना जरूरी है।
बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका
कोरोना वायरस महामारी के चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका है और आने वाले महीनों में हालात बिगड़ सकते हैं। अमेरिका में 21 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान रिकॉर्ड 33 लाख अमेरिकियों ने प्रारंभिक बेरोजगारी के दावे किए हैं। देश में लाखों लोग अपनी नौकरी खो चुके हैं।